संवाद न्यूज एजेंसी
डबवाली। पंजाब और राजस्थान की सीमा पर स्थित पुलिस जिले में डबवाली पुलिस के लिए नशे पर लगाम लगाना बेहद मुश्किल होता जा रहा है। जागरूकता के साथ ही अन्य अभियानों के बावजूद क्षेत्र में नशा तेजी से बढ़ रहा है। इधर, डबवाली के नागरिक अस्पताल स्थित नशा मुक्ति केंद्र में 10 बेड के भरोसे प्रतिमाह 1000 पीड़ितों का इलाज किया जाता है। नशे से पीड़ित लोगों की ओपीडी प्रतिदिन 200 से 250 के आसपास है।
प्रदेश के आखिरी कोने पर स्थित डबवाली की भौगौलिक स्थिति इस प्रकार की है कि नशे को रोकना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। सीमाविहीन नशे के इस आदान-प्रदान का असर गांवों और कस्बों के युवाओं पर पड़ रहा है। युवा बड़ी तेजी से नशे के दलदल में धंसते जा रहे हैं। इसकी गवाही सरकारी अस्पताल की व्यवस्था और आंकड़े दे रहे हैं।
सरकार ने डबवाली को पुलिस जिला वर्ष 2024 में बनाया था। उसके बाद से पुलिस बड़े-बड़े दावे कर चुकी है। नशा मुक्ति वार्ड से लेकर गांवों तक की घोषणा हुई लेकिन हालात आज भी जस के तस हैं।
युवाओं के रंगों में तेजी से बढ़ रहा नशा : बॉर्डर पर होने के कारण डबवाली में बड़े स्तर पर युवा नशे की गिरफ्त में हैं। इन युवाओं का नागरिक अस्पताल में उपचार करवाया जाता है, पुलिस भी माह में 30 से ज्यादा युवाओं को उपचार के लिए लेकर आती है। महज 10 बेड का नशा मुक्ति केंद्र होने पर युवाओं काे दवा दिलाकर वापस घरवालों के हवाले कर दिया जाता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रति माह दवा लेने के लिए एक हजार के आसपास युवा व लोग आते हैं। नशा मुक्ति केंद्र में बेड की कमी और पुनर्वास केंद्र की कमी युवाओं के नशे से बाहर आने की गति में बाधा बनी हुई है।
उपचार भी बना नशे का स्रोत : सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में युवक नागरिक अस्पताल में नशा छुड़वाने के लिए मिलने वाली दवाइयों का कथित तौर पर नशे के रूप में प्रयोग करने लगे हैं। अस्पताल प्रबंधन ऐसे मामलों में एहतियात बरतने की कोशिश कर रहा है। लेकिन कामयाबी नहीं मिल रही है। यही कारण है कि दवाओं का दुरुपयोग शुरू हो गया है। हालांकि, कुछ मामलों में युवाओं ने दवाओं से नशा भी छोड़ा है।