फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

छात्राओं को डेरा ले जाकर नाम दान दिलाने का आरोप

Wed, 03 Dec 2014 12:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
विज्ञापन
विज्ञापन
राजकीय कन्या स्कूल की छात्राओं को टूर के नाम पर डेरा सच्चा सौदा में ले जाने के मामले में मंगलवार को उस समय नया मोड़ आ गया जब,
विज्ञापन

 
सिख समाज के लोग इसके विरोध में स्कूल में एकत्रित हुए और रोष जताते हुए छात्राओं के साथ गए स्टाफ सदस्यों के खिलाफ कारवाई की मांग की।

जब पंथक सेवा लहर के प्रमुख संत बलजीत सिंह दादूवाल के कालांवाली में पहुंचने की खबर आई तो मामला गर्मा गया। हलांकि इस मामले में दोनों अध्यापिकाओं को डेपुटेशन पर भेज दिया गया है।
 
जानकारी अनुसार 28 नवंबर को डेरा से जुडे़ कुछ लोग राजकीय कन्या स्कूल की छात्राओं से मिले और उन्होंने स्कूल की दो अध्यापिकाओं से संपर्क किया।

उन्होंने छात्राओं को सिरसा स्थित एक रेस्टोरेंट दिखाने की बात की। दोनों अध्यापिकाओं ने इसके लिए स्कूल से छात्राओं को तैयार किया।

स्कूल प्रशासन व विभाग को इस बारे में कोई सूचना नहीं दी गई और न ही उनसे इजाजत ली गई। 30 नवंबर को स्कूल की लगभग 200 छात्राएं एक जगह एकत्रित हुईं और स्कूल की दोनों अध्यापिकाएं उन्हें बसों में लेकर सिरसा रवाना हो गईं।
विज्ञापन


किरण कौर, अमनदीप कौर, परमिंद्र कौर, संदीप कौर, जसप्रीत कौर, रानी आदि स्कूल की छात्राओं ने बताया कि अध्यापिकाएं उन्हें एक होटल दिखाने के बाद डेरा सच्चा सौदा सिरसा में चल रहे सत्संग में ले गईं। जहां उन्हें जाम पिलाने व नाम दान लेने के लिए कहा।
रेलवे स्टेशन पर ही छोड गई अध्यापिकाएं
छात्राओं ने आरोप लगाया कि दोनों अध्यापिकाएं उन्हें रात को स्टेशन पर छोड़कर अपने घर चली गईं । टूर पर ले जाने से पहले उन्होंने कहा था कि जिस तरहसे ले जा रहे हैं उसी तरह से घर तक भी छोड़ देंगे पर ऐसा नहीं हुआ।

वे मुश्किल से अपने-अपने घर पहुंची। इस बात की जानकारी जब छात्रों के अभिभावकों को लगी तो वे मंगलवार को स्कूल में एकत्रित हुए और उनकी लड़कियों का जबरदस्ती नाम दान दिलवाने वाले लोगों पर कार्रवाई की मांग की।

मामला की गंभीरता को देखते हुए कार्यवाहक जिला शिक्षा अधिकारी सुरेश कुमार मौके पर पहुंचे और अभिभावकों व छात्राओं से बात कर कार्रवाई की बात कही।
खेद व्यक्त करते हैं
स्कूल की छात्राओं को डेरा में ले जाने व एक रेस्टोरेंट दिखाने के लिए कहा था। सभी छात्राओं को कहा था कि वे अपने अभिभावकों की इजाजत लेकर आएं अगर हो सके तो उन्हें साथ लेकर आएं।
विज्ञापन


डेरा की स्थापना 1948 से लेकर आज तक किसी को जबरदस्ती जाम पिलाने या नाम दान देने की कोशिश नहीं की गई। डेरा प्रेमियों की तरफ से सभी छात्राओं को घर पहुंचाया गया फिर भी किसी को दिक्कत आई तो वे इसके लिए वे खेद व्यक्त करते हैं।
पवन इंसा, ब्लॉक भंगी दास


फोटो-मामले को लेकर एकत्र अभिावक व अधिकारी
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें