नगर परिषद की अतिक्रमण हटाओ मुहीम को उस वक्त झटका लगा जब तोड़ी गई अवैध दुकानों को दुकानदारों ने फिर से बना लिया। दुकानदारों ने कोर्ट की शरण भी ले रखी है।
उनका कहना है कि केस कोर्ट में है। अब कार्रवाई नहीं हो सकती। यह दुकानें उनकी रोजी रोटी का साधन हैं। वहीं नगर परिषद का कहना है कि दुकानदारों का ऐसा करना जुर्म है।
उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ज्ञात हो कि नगर परिषद ने दुकानदारों के भारी विरोध के बीच सोमवार को लक्कड़मंडी से अवैध कब्जे गिराए थे। दुकानदारों ने विरोध स्वरूप दुकानों के शटर गिराकर नगर परिषद की कार्रवाई का विरोध किया था।
लोगों के विरोध को देखते हुए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा था। भारी पुलिस बल को देखकर कब्जाधारियों ने खुद की दुकानें गिरानी शुरू कर दी थीं। नगर परिषद की करीब चार घंटे तक कार्रवाई चली। सात दिन पहले नोटिस इन दुकानदारों को अवैध कब्जे हटाने के नोटिस थमाए थे।
रातोरात बना लीं दुकानें
सोमवार करीब दोपहर बाद नगर परिषद की टीम लक्कड़मंडी से अवैध कब्जे धारियों की दुकानें गिराने पहुंची थी जिसका विरोध भी हुआ था।
ईओ के आदेश पर तीन दुकानें तो मौके पर ही गिरा दी गईं। बाकी दुकानों को दुकानदारों ने मिलकर तोड़ दिया था। मगर मंगलवार को नगर परिषद के कर्मचारी मौके का मुआयना करने पहुंचे तो हैरान हो गए। दुकानदारों ने कब्जे वाली जगह पर रातोंरात दुकानें बना ली थीं। अबकी बार दुकानदारों से पहले के बजाय ज्यादा मजबूत दुकानें बना ली हैं।
ईओ से कोर्ट में निपटेंगे : दुकानदार
इस मामले में अवैध कब्जा जमाए दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने अपने हक के लिए लड़ना है और इसके लिए उन्होंने कोर्ट की शरण ले ली है।
वे अब कोर्ट में ही ईओ से निपटेंगे। ये दुकानें उनकी रोजी रोटी का साधन हैं। अगर दुकानें नहीं रहीं तो वे सभी सड़क पर आ जाएंगे।
एफआईआर होगी दर्ज : ईओ
अतिक्रमण हटाने के बाद दोबारा उसी जगह पर दुकानें बनाने की जानकारी कर्मचारियों से मिल चुकी है। अभी दो दिन के लिए बाहर हूं। आते ही दोबारा अवैध दुकानों को तोड़ेंगे। यह सरासर कानून का उल्लंघन है। इससे गलत संदेश जाता है। दुकानदारों के खिलाफ अतिक्रमण की धारा 133 के तहत कार्रवाई की जाएगी। एफआईआर भी दर्ज हो सकती है। अत्तर सिंह, ईओ, नगर परिषद