गांव धौलपालिया में जमीन के लिए पिता को मौत के घाट उतारने वाले पुत्र को जिला एवं सत्र न्यायालय ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। हत्यारे पर न्यायालय ने सात हजार रुपये जुर्माना भी लगाया, राशि नहीं भरने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने 33 महीनों में इस मामले का निपटारा किया है। मामले के अनुसार गांव धौलपालिया निवासी काशीराम चार पुत्रों का पिता था।
काशीराम अपने चारों पुत्र रामकुमार, मदनलाल, राजेंद्र व दौलतराम को अपनी चल-अचल संपत्ति समभाग में देना चाहता था, लेकिन सबसे बड़े पुत्र रामकुमार की मृत्यु के कारण काशीराम उसके दोनों नाबालिग बच्चों को उसका हिस्सा देने की तैयारी कर ली। यह बात मदनलाल को अखर रही थी। मदन लाल ने इससे पूर्व भी अपने पिता काशीराम के साथ मारपीट की थी। छह मार्च 2013 को पिता से हिस्से में आए एक भूखंड को काशीराम ने बेचकर उसके रुपये अपने मृतक बड़े बेटे के नाबालिग बच्चों को दे दिए थे। इससे गुस्साए मदनलाल ने आठ मार्च को पिता काशीराम पर धारदार हथियार से हमला कर दिया।
हमले में काशीराम गंभीर रूप से घायल हो गया। ग्रामीणों ने उसे सामान्य अस्पताल में दाखिल करवाया। यहां कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। हत्या की सूचना मिलने पर ऐलनाबाद पुलिस अस्पताल पहुंची। पुलिस ने मृतक काशीराम के छोटे पुत्र दौलतराम का बयान दर्ज करके बड़े पुत्र मदन लाल के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया। इसके बाद पुलिस ने हत्यारोपी मदन लाल को गिरफ्तार करके अदालत समक्ष पेश किया। वीरवार को इस मामले का निपटारा करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिमलेश तंवर ने मदन लाल को पिता की हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुना दी।