सिरसा। हरियाणा में घग्गर नदी का प्रदूषण, कमजोर तटबंध और तेजी से गिरता भूजल स्तर जल प्रबंधन की गंभीर चुनौती बन गए हैं। वर्ष 2025 के आकलन के अनुसार प्रदेश में भूजल दोहन 136.75 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
घग्गर के प्रदूषित हिस्से की सफाई और बाढ़ नियंत्रण के लिए ठोस कार्ययोजना की जरूरत सामने आई है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के 19 अक्तूबर 2026 के जवाब के बाद सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने इन मुद्दों पर केंद्र और प्रदेश सरकार से संयुक्त पहल की मांग की है।
घग्गर के दो हिस्से गंभीर प्रदूषित : केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अक्तूबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, घग्गर नदी के दो हिस्से गंभीर प्रदूषण वाली प्राथमिकता-एक श्रेणी में हैं। इनमें एक पंजाब और दूसरा हरियाणा में है। मंत्रालय के जवाब में पंजाब में 57.10 करोड़ रुपये की स्वीकृत परियोजनाओं और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का उल्लेख है। हरियाणा के हिस्से के लिए किसी विशिष्ट स्वीकृत परियोजना और समयसीमा की जानकारी नहीं दी गई।
तटबंध कमजोर, बाढ़ का खतरा : घग्गर के कमजोर तटबंध सिरसा, फतेहाबाद और आसपास के क्षेत्रों में मानसून के दौरान बाढ़ का खतरा बढ़ाते हैं। मंत्रालय के अनुसार, दोनों राज्यों की परियोजना रिपोर्ट निर्धारित तकनीकी सिफारिशों के अनुरूप नहीं मिलीं। संशोधित मॉडल अध्ययन की प्रक्रिया जारी है।
कुमारी सैलजा ने केंद्र और हरियाणा सरकार से संयुक्त बैठक बुलाकर बजट, जिम्मेदार विभाग और समयसीमा तय करने की मांग की है। उन्होंने घग्गर की सफाई, तटबंधों की मजबूती, नहरों के आधुनिकीकरण और भूजल पुनर्भरण को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई।