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Sirsa News: गो माता सृष्टि की धुरी व सनातन की आधारशिला

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गांव बुर्जभंगू की श्री हरिराम गोशाला में में चल रही गोकथा को सुनने हुए श्रद्धालु। 
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सिरसा। गांव बुर्जभंगू की श्री हरिराम गोशाला में चल रही श्री धेनू मानस कथा के पंचम दिवस पर कथा व्यास गो ऋषि स्वामी राजेंद्रानंद महाराज ने गो माता के वैज्ञानिक, आध्यात्मिक और पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डाला। स्वामी राजेन्द्रानंद महाराज ने कहा कि गो माता केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि की धुरी हैं।
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गो माता के बिना न केवल कृषि व्यवस्था अपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण संतुलन भी असंभव है। उन्होंने बताया कि गोशाला केवल गो संरक्षण का स्थल नहीं, बल्कि एक पर्यावरणीय संतुलन केंद्र भी है। गो माता की ओर से प्रदत्त पंचगव्य, गोमूत्र, गोबर, दूध, दही और घी का वैज्ञानिक उपयोग पर्यावरण संरक्षण और जैविक कृषि के लिए अत्यंत लाभकारी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जैविक खेती में गो आधारित उत्पादों का उपयोग भूमि की उर्वरता बढ़ाने और जल स्रोतों को संरक्षित रखने में सहायक सिद्ध हुआ है।

गो माता से जुड़े वैज्ञानिक और औषधीय तथ्य

महाराज ने बताया कि आधुनिक विज्ञान भी गो माता की महिमा को स्वीकार कर रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि गोमूत्र में स्वर्णक्षार पाए जाते हैं, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। गाय के गोबर से बना बायोगैस पर्यावरण को स्वच्छ रखने में सहायक है और यह एक प्राकृतिक ऊर्जा स्रोत भी है। पंचगव्य का उपयोग कैंसर, मधुमेह और हृदय रोगों के उपचार में कारगर सिद्ध हुआ है। गाय से उत्पन्न ध्वनि तरंगें सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं, जिससे मानसिक तनाव कम होता है।
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गो रक्षा सनातन धर्म की आत्मा

महाराज ने गो रक्षा को सनातन धर्म की आत्मा बताया और कहा कि गो माता की सेवा ही सच्ची साधना है। हमें केवल उपासना तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने आचरण में गो सेवा को अपनाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गो माता की रक्षा केवल धार्मिक दायित्व नहीं, बल्कि यह मानव जाति का नैतिक कर्तव्य है। गो हत्या न केवल धर्म के विरुद्ध है, बल्कि यह प्राकृतिक असंतुलन और अनेक आपदाओं का कारण भी बनती है।

भजन संध्या और गो महिमा पर प्रश्नोत्तर सत्र

कथा के अंत में एक विशेष भजन संध्या का आयोजन किया गया। इसके बाद गो माता और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित एक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। इसमें महाराज ने भक्तों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। श्री धेनू मानस कथा के षष्ठम दिवस पर गो माता और सनातन संस्कृति का अभिन्न संबंध, भगवान श्रीकृष्ण की गो सेवा और आधुनिक युग में गोशालाओं की भूमिका पर विशेष प्रवचन दिया जाएगा।
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