सिरसा। राजकीय स्कूलों में अब मिड-डे मील वर्कर को एक जुलाई से नए यूनिफॉर्म में आना होगा। निदेशालय द्वारा ड्रेस कोड बदल दिया गया है। पहले मिड डे मील वर्कर नीला और काले रंग की ड्रेस में भोजन बनाती थीं। इसमें बदलाव करते हुए विभाग ने हरे रंग की ड्रेस कर दी है। इस संबंध में निदेशालय ने सभी मौलिक शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर दिए हैं।
जिला में मिड-डे मील वर्कर को अब हरे रंग की ड्रेस में आना होगा। निदेशालय ने सख्ती करते हुए आदेश जारी किए हैं कि एक जुलाई से ड्रेस में अनिवार्य है। जिले में इस फैसले का असर कुल 1862 वर्कर पर पड़ेगा। विभाग के अनुसार पहली बार मिड-डे मील कार्यकर्ताओं की ड्रेस को बदला गया है। जिले में 831 स्कूल में कुल 90 हजार विद्यार्थियों को मिड-डे मील दिया जाता है। शिक्षा विभाग द्वारा वर्करों को साल में दो ड्रेस के पैसे मिलते हैं।
वर्करों ने कहा- ड्रेस तो बदल दी, खरीदने के लिए पैसे भी बढ़ाए जाएं
मिड-डे मील यूनियन की जिला सचिव राजरानी, जिला प्रधान संतोष रानी, सिरसा ब्लॉक मंजू रानी ने बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा ड्रेस को बदल दिया गया है, जिसका स्वागत करते हैं। लेकिन सरकार द्वारा ड्रेस के लिए जो पैसे निर्धारित किए गए हैं वो बहुत कम है। सरकार एक ड्रेस के लिए 300 रुपये देती है। इस पैसे से महिलाओं को दुपट्टा तक नहीं आता है। मान लीजिये 70 रुपये मीटर कपड़ा ड्रेस के लिए खरीदा जाए तो इस हिसाब से 350 का तो कपड़ा ही हो गया। वहीं, इसके बाद 250 रुपये ड्रेस की सिलाई शुरू होती है। करीब 200 रुपये का दुपट्टा आता है। इस हिसाब से 800 रुपये प्रति ड्रेस की लागत आती है। इसलिए विभाग को ड्रेस के लिए दिए जाने वाले पैसे में भी बढ़ोतरी करनी चाहिए।
एक जुलाई से पहले की तरह बनाया जाएगा मिड-डे मील
कोरोना काल के दौरान 832 स्कूलों में मिड-डे मील नहीं बन रहा था। दो महीने पहले मिड डे मील बनाने के आदेश जारी किए गए थे। कुकिंग कास्ट के कारण मिड डे मील स्कूलों में ढंग से नहीं बन पा रहा था। शिक्षा विभाग कुकिंग कास्ट को लेकर बैकपुट पर आ चुका है और एक जुलाई से स्कूलों में ही विद्यार्थियों को पहले की तरफ से मिड-डे मील देने के आदेश दिए गए हैं।
वर्जन
मिड-डे मील कार्यकर्ताओं की ड्रेस में बदलाव किया गया है। एक जुलाई से वर्करों को हरे रंग की ड्रेस में आना होगा। --- संजय मोंगा, नोडल अधिकारी, मिड डे मील, सिरसा।