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मच्छरों के आतंक से निपटने में सक्षम नहीं मलेरिया विभाग, खाली पड़े हैं 75 प्रतिशत पद

Fri, 24 Jun 2016 01:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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मच्‍छर - फोटो : Desk
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मानसून का आगमन हो चुका है और अब बरसात का दौर चलता रहेगा। ऐसे में मच्छरों से होने वाले मलेरिया से बचने के लिए अगर लोग विभाग के भरोसे न रहें तो बेहतर होगा। 75 प्रतिशत स्टाफ की कमी के चलते जागरुकता कार्यक्रम कम चल पा रहे हैं। वहीं स्टाफ की कमी ने शुरू हो चुके बरसाती सीजन में लोगों की मुश्किलें और भी बढ़ा दी है। ऐसे में लोगों के पास एक ही विकल्प है कि वे खुद ही मलेरिया के प्रति जागरूक हो जाएं और अपने स्वास्थ्य का ध्यान स्वयं रखें।
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जिला मलेरिया विभाग में सहायक मलेरिया अधिकारी के पद रिक्त पड़ें हैं। यही नहीं, दवाओं के छिड़काव व जागरुकता के अभियान की देख-देख करने के लिए 45 फील्ड वर्करों की जगह महज आठ फील्ड वर्कर काम कर रहे हैं। इस कारण मानसून में पानी एकत्रित होने वाली जगहों पर दवा का छिड़काव प्रभावित हो रहा है। सुपरवाइजरों की संख्या भी 40 प्रतिशत है। इन आंकड़ों से यह साफ है कि मच्छरों के आतंक से लड़के लिए स्वास्थ्य विभाग कितना तैयार है। जिले में वर्ष 2001 से लेकर 2015 तक करीब 12 हजार मलेरिया के मामले आ चुके हैं। खास बात यह है कि मलेरिया विभाग के पास जिले में एक ही फोगिंग मशीन है जो अधिकतर समय तक खराब रहती है। एक मशीन के सहारे जिलेभर में दवा का छिड़काव करने में बहुत समय लग जाता है।

मलेरिया संभावित स्थानों का चयन
मानसून का आगमन होने के साथ ही मलेरिया विभाग ने मलेरिया संभावित स्थानों का चयन कर लिया है। सिरसा शहर में खैरपुर, चत्तरगढ़टी व जेजे कॉलोनी क्षेत्र को चुना गया है। ग्रामीण इलाकों में चौपटा क्षेत्र का चयन किया गया है। इन स्थानों पर अब विभाग की  लगातार नजर रहेगी। मलेरिया अधिकारी डॉक्टर दीप का कहना है कि इन क्षेत्रों को काफी गड्ढे  हैं जिसमें बरसात का पानी भर जाता है। पिछले साल भी सबसे अधिक मलेरिया के केस इन स्थानों से ही आए थे। आशा वर्कर के साथ विभाग के फील्ड वर्कर लोगों को बता रहे हैं कि कूलरों का पानी लगातार बदलते रहे और अपने घरों के आस पास पानी एकत्रित नहीं होने दे। सफाई से ही मलेरिया फैलाने वाले मच्छर से बचा जा सकता है।
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सुभाष बस्ती में मिला लार्वा
घरों में जाकर लोगों को जागरूक करने के दौरान मलेरिया विभाग की टीम को शहर की सुभाष बस्ती में मच्छर का लार्वा मिला। जिला मलेरिया अधिकारी डॉक्टर दीप ने बताया कि विभाग ने नोटिस जारी कर दिया है। इसके अलावा सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिए गए हैं अपने कूलरों का पानी प्रतिदिन बदले। कार्यालय में ऐसा कोई कबाड़ नहीं होना चाहिए जिसमें लार्वा पनप पाए। ऐसा होने पर संबंधित सरकारी विभाग के अधिकारी पर जुर्माना किया जाएगा।

खुद जागरूक होना होगा
मलेरिया विभाग में स्टाफ व संसाधन की भारी कमी के कारण जहां मलेरिया की रोकथाम और जनता को जागरूक करने के प्रयास थमे नजर आ रहे हैं, ऐसे में लोगों को खुद ही जागरूक होना होगा। मलेरिया के कारण व इससे बचने के लिए उपाय  भी लोगों को स्वयं ही अपनाने होंगे।

क्या है मलेरिया
सामान्य रूप में मलेरिया मच्छर मादा एनाफिलीज के काटने से फैलने वाली बिमारी है। मादा एनाफिलीज ही मलेरिया के कारक प्लाजमोडियम नामक प्रोटोजोआ का वाहक होती है। मादा एनाफिलीज ही संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में इसका प्रसार करती है। सामान्य तौर पर इस मच्छर के काटने के 14 दिन बाद मलेरिया के लक्षण सामने आते हैं।

मलेरिया के लक्षण
सिर दर्द व उल्टी आना।
सर्दी व कंपन के साथ तेज बुखार।
बुखार हर रोज या एक दिन छोड़कर आना।
कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है।

ये उपाय करें
बुखार होने पर खून की जांच करवाएं।
मलेरिया की दवा सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त उपलब्ध है।
ऐसे कपड़े पहनें, जिनसे बाहें और टांगें ढकी रहें।
डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लें।
नीम-हकीमों के चक्कर में न पड़ें।

ऐसे करें मच्छरों पर नियंत्रण
अनावश्यक जलभराव नहीं होने दें।
सोते समय मच्छरदानी लगाएं।
खुले अंगों पर सरसों या नीम का तेल लगाएं।
सप्ताह से पहले ही कूलर, टैंक व घड़ों का पानी बदलें।

स्टाफ का है भारी टोटा
विभाग में स्टाफ का भारी टोटा है। मेरे समेत कुल 27 कर्मचारी कार्यरत हैं और 75 प्रतिशत पर खाली पड़े हैं। 13 लाख से अधिक आबादी वाले सिरसा जिले में मात्र 27 कर्मचारी कितना कार्य कर सकते हैं। हम अपनी तरफ से पूरा प्रयास करते हैं लेकिन ये क्षेत्रफल के हिसाब से पर्याप्त नहीं। सरकार को जल्द से जल्द मलेरिया विभाग के खाली पदों को भरना चाहिए।
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- डॉक्टर दीप, जिला मलेरिया अधिकारी सिरसा।
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