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Sirsa News: चौटाला में महापंचायत, सरकार की सदबुद्धि के लिए करवाया यज्ञ, 17 से होगा अनिश्चितकालीन आंदोलन

Tue, 06 Feb 2024 12:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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धरने पर बैठे किसानों को सम्बो​धित करते हुए किसान नेता। किसान
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संवाद न्यूज एजेंसी।
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सिरसा। गांव चौटाला में सोमवार को किसानों व मजदूरों ने महापंचायत की। इसमें निर्णय लिया कि 17 फरवरी को चौटाला गांव के बाहर हाईवे पर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा। ग्रामीणों ने सरकार की सदबुद्धि के लिए यज्ञ करवाया।पंचायत के बाद किसानों व मजदूरों ने तहसीलदार को सरकार के नाम अपना ज्ञापन सौंपा।
पंचायत में किसानों ने 2020 का करीब 42 करोड़ रुपये के बकाया मुआवजे और वर्ष 2023 सहित बकाया फसल बीमा क्लेम जारी करने और अन्य मांग मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। पंचायत में अखिल भारतीय किसान सभा, भारतीय किसान यूनियन, सीआईटीयू और संयुक्त किसान मोर्चा से संबंधित कई संगठनों से जुड़े किसानों मजदूरों ने भाग लिया।
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भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रवि आजाद ने कहा कि उनका संगठन किसान-मजदूरों के साथ डटकर संघर्ष में खड़े है। एक मंच पर तमाम संगठन व्यापक आंदोलन लड़ेंगे। पंचायत में किसान नेताओं ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है कि 16 फरवरी को भारत बंद को सफल करेंगे और 16 तक जिले भर में गांव-गांव में जाकर बकाया मुआवजे और फसल बीमा क्लेम सहित अन्य मांगों के संबंध में जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। 17 फरवरी से चौटाला गांव के बाहर हाईवे पर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा। पंचायत में मुख्य वक्ता के रूप मेंराकेश फगोडि़या, नत्थुराम भारुखेडा़, राजेंद्र रूपावास, रमेश भादू नगराना, भरत झाझडा़, सोहनलाल भारुखेडा़, कुलदीप गदराना, पूनम गोदारा तेजाखेडा़, संजय मिड्डा रहे है।
पंचायत में मुख्य रूप से महावीर नैण, संजय नैण, सरपंच सुभाष बिश्नोई, राजाराम लोहमरोड़, रणवीर लोहमरोड़, पूर्व सरपंच आत्माराम छिम्पा, पूर्व सरपंच कृष्ण बिश्नोई, सरपंच भादरराम, सिंघाठिया, पंचायत समिति मेंबर भोजराज स्वामी, सुशील गोयल, अभिषेक गोदारा आदि शामिल हुए।
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उपमुख्यमंत्री का पैतृक गांव हैं चौटाला
गांव चौटाला में किसानों को मुआवजा ने मिलना कई सवाल खड़े करता है। किसानों व मजदूरों के अनुसार उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को पैतृक गांव होने के बावजूद किसानों के साथ अनदेखी हो रही है। किसानों को मुआवजे और बीमा क्लेम के लिए आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। इससे पता चलता है कि सरकार किसानों के प्रति कितनी संजीदा है। उप मुख्यमंत्री किसानों के हकों की बात करते है। ऐसे में जब उनके खुद के पैतृक क्षेत्र में किसानों को मुआवजा नहीं मिलना, सरकार की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
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