ओढां (सिरसा)। लंपी आशंकित बीमारी की चपेट में आकर आए दिन हो रही गोवंशों की मौत से पशुपालकों में बेचैनी है। इस बीमारी से पशुओं को बचाने के लिए इलाज पर काफी खर्च करना पड़ा रहा है। इसके बावजूद गोवंशों की मौत का सिलसिला जारी है। क्षेत्र के कई गांवों में अभी तक वैक्सीन नहीं पहुंचने से पशुओं का टीकाकरण प्रारंभ नहीं हो सका है। वहीं, पशुपालकों ने पशुपालन विभाग पर मृत गोवंशों की मौतों का आंकड़ा छुपाने का आरोप लगाया है।
गांव नुहियांवाली में लंपी आशंकित बीमारी से कई घरों में विकट स्थिति देखी जा रही है। गांव में हर रोज 6-7 गोवंश की मौत हो रही है। पशुपालक विनोद सहारण ने बताया कि उसके घर में दो दुधारू गाय लंपी की चपेट में आ गई थीं। उनके इलाज पर उसने काफी पैसा खर्च कर दिया, लेकिन फिर भी 4 दिन के अंतराल में दोनों गाय की मौत हो गई। वहीं, सुल्तान सिंह ने बताया कि उसके घर एक गाय की मौत हुई है। गाय को बचाने के लिए उसने उपचार पर काफी पैसा खर्च कर दिया, लेकिन फिर भी गाय नहीं बची।
किसान कालूराम ने बताया कि उसने इस रोग से संक्रमित अपने बैल पर करीब आठ हजार रुपये खर्च कर दिए। इसके बाद भी उसके बैल की मौत हो गई। वहीं, गांव की गोशाला में करीब 24 गोवंश लंपी की चपेट में हैं। पशुपालन विभाग सिर्फ उन्हीं की गिनती बता रहा है, जिनका चिकित्सालय से उपचार चल रहा है।
हड्डा रोड़ी में मृत पशुओं को डालने के जगह कम पड़ गई है। गांव में घूम रहे बेसहारा गोवंश लंपी से संक्रमित होकर अन्य पशुओं के लिए घातक बन गए हैं। पशुपालकों का आरोप है कि गांव में लंपी आशंकित रोग से पशु मर रहे हैं। इसके बावजूद विभाग द्वारा अभी तक कोई टीकाकरण शुरू नहीं किया गया है। लोगों ने कहा कि अगर प्रशासन ने इस ओर शीघ्र ही ध्यान नहीं दिया तो उनके घरों में पशुधन बचेगा ही नहीं।
पशुपालकों ने बताया कि गांव में करीब 300 वैक्सीन डोज पहुंची थी, जो कि गोशाला में गोवंश को लगाई गई है। गांव में अभी तक वैक्सीनेशन शुरू नहीं हुआ है। नुहियांवाली में मृत पशु उठाने वाले गौरव कुमार के मुताबिक जब से ये रोग फैला है, तब से गांव में हर रोज औसतन छह से सात गोवंशों की मौत हो रही है। शनिवार को गांव में एक दिन में दर्जनभर पशुओं की मौत हुई थी।
हमारे पास 300 डोज आई थी। वह गोशाला में लगा दी गई है। डोज आते ही पूरे गांव में टीकाकरण शुरू कर दिया जाएगा। मृत पशुओं के आंकड़ों की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
-- सोनू, वीएलडीए (नुहियांवाली)।
सरकार को इस विषय में न केवल शीघ्र ध्यान देने की आवश्यकता है, बल्कि पर्याप्त मात्रा में डोज भी जल्द भेजी जानी चाहिए। गोशालाओं के अलावा बेसहारा घूम रहा गोवंश अधिक चपेट में है। पशु अस्पतालों में स्टाफ की कमी भी भारी पड़ रही है।
-- योगेश बिश्नोई, जिला प्रधान (गोवंश-गोशाला सेवा संघ)