श्रीराम मंदिर में कथा श्रवण करतीं महिलाएं।
ऐलनाबाद। शहर के वार्ड 9 में स्थित श्रीराम मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के सातवें दिन कथा में श्रीश्री 108 भरत मुनि उदासीन (श्रीपंचमुखी मंदिर) महाराज ने कहा कि कलि-दोष शमनार्थ भगवन्नाम महौषधि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी लीला के माध्यम से जीवन के प्रत्येक पक्ष को प्रस्तुत किया है।
महाराज ने कहा कि प्रभु के जीवन चरित्र में निहित संदेशों को हृदयंगम कर मनुष्य अपना सर्वांगीण अभ्युत्थान कर सकता है। जीवन में विपरीत परिस्थितियां आए, संकट आ घेरे, चुनौतियों आ खड़ी हो, तो ऐसे समय में अविचलित रहकर उनसे कैसे पार पाना है। कैसे उन पर विजय प्राप्त करती है। यह भगवान ने अपने कार्यों के माध्यम से बताया है। एकादश स्कंध जीवन का अथाह ज्ञान है। दशम स्कंध लीला सिंधू है तो एकादश स्कंध ज्ञान सिंधू है।
प्रभु का नाम संकीर्तन कलियुग के दोषों को शमन करने की रामबाण महौषधि है। जिस फल की प्राप्ति अन्य युगों में घोर तपस्या करने योग समाधि लगाने, बड़े यज्ञ करने तथा भगवान की अर्चना करने से नहीं मिलता उस फल की प्राप्ति कलियुग में सिर्फ नाम संकीर्तन (चलने, फिरते, उठते बैठते, सोते जागते) नाम जप से मिल जाता है। कथा सुनने के लिए भारी संख्या में महिलाएं व पुरुष पहुंचे।