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शराब जब्ती का मामला : आबकारी विभाग ने कोर्ट में रखा अपना पक्ष, कारिंदे को नहीं मिली जमानत

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गांव मलिकपुरा शराब ठेके से जब्त की गई 971 बोतल शराब के मामले में आबकारी विभाग के निरीक्षक जयवीर सिंह वीरवार को कोर्ट में पहुंचे। जहां ठेकेदार के वकील ने कोर्ट को अवगत करवाया कि ठेकेदार द्वारा विभाग को 2 लाख रुपये की फीस भरी गई थी। जिसकी उसके पास बकायदा रसीद भी है। इसके बावजूद भी विभाग ने ठेकेदार की शराब जब्त कर ली। जब इस बारे कोर्ट ने निरीक्षक जयवीर सिंह से जवाब मांगा तो उसने कहा कि ठेकेदार ने फीस तो भर दी थी लेकिन रसीद को सबमिट नहीं करवाया।
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इस दौरान आबकारी निरीक्षक ने कहा कि पहले फीस जमा करवाने की प्रक्रिया ऑनलाइन नहीं थी। इसलिए फीस भरकर रसीद एप्लीकेशन देकर डीईटीसी कार्यालय में सबमिट करवानी पड़ती थी। जो ठेकेदार द्वारा नियमानुसार नहीं करवाई। निरीक्षक के मुताबिक जिस वक्त ठेकेदार ने फीस जमा करवाई उस समय प्रक्रिया ऑनलाइन नहीं थी। इस मामले में ठेकेदार के वकील ने दलील देते हुए कहा कि ऑनलाइन अप्लाई करने व फीस भरने के बाद आबकारी विाग के पास 10 दिन का समय होता है। इस अवधि में अगर कोई आपत्ति होती है तो आबकारी विभाग इसे रद्द कर सकता है। लेकिन विभाग ने इस अवधि के दौरान आपत्ति न जताते हुए कोई कार्रवाई नहीं की। इसके अलावा विभाग ने 3-4 बार ठेका भी चेक कर लिया। कोर्ट ने इस सुनवाई को शुक्रवार तक टाल दिया। वहीं इस मामले में ठेके के कारिंदे कुलदीप सिंह को वीरवार को भी जमानत नहीं मिल पाई।
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