सिरसा। जिले की अदालतों में सरकारी अधिवक्ताओं की कमी के कारण आपराधिक मामलों की सुनवाई प्रभावित हो रही है। हालात ये हैं कि अदालतों में मामलों की पैरवी व गवाही समय पर नहीं हो पा रही है। इससे पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने में देरी हो रही है। जिले में कुल 23 अदालतें हैं। इनमें केवल 15 सरकारी अधिवक्ता ही कार्यरत हैं। पिछले सप्ताह तक यह संख्या केवल 10 थी। मौजूदा समय में अदालतों में 38 हजार 102 आपराधिक मामले लंबित हैं।
अधिवक्ताओं के अनुसार, कई सरकारी अधिवक्ताओं के पास एक से अधिक अदालतों का कार्यभार है। ऐसे में उनका अलग-अलग अदालतों में एक ही समय पर उपस्थित होना मुश्किल होता है। इस कारण प्रतिदिन कई मामलों में सुनवाई टल जाती है। इसके अलावा, गवाहों को भी घंटों अदालतों में इंतजार करना पड़ता है। तारीख पर तारीख मिलने से पीड़ित पक्ष को मानसिक व आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती है।
जिले की 23 अदालतों में इस समय 38 हजार 102 आपराधिक मामले लंबित हैं। अधिवक्ताओं के अनुसार, सरकारी वकीलों की कमी का सबसे अधिक असर ट्रायल व बहस की प्रक्रिया पर पड़ रहा है। अधिकतर मामलों में गवाही व बहस समय पर पूरी नहीं हो पा रही है। इससे केस लंबे समय तक लटके रहते हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि कई सरकारी अधिवक्ताओं ने अपनी तैनाती प्रतिनियुक्ति पर दूसरे जिलों में करवा रखी है। जिन अधिवक्ताओं की नियुक्ति सिरसा में हुई है उन्हें यहीं सेवाएं देनी चाहिए ताकि अदालतों पर लंबित मामलों का बोझ कम हो सके।
बार-बार गांव से शहर आना नहीं आसान : जिला बार एसोसिएशन के उप प्रधान अधिवक्ता केवल कंबोज का कहना है कि सरकारी अधिवक्ताओं की कमी काफी समय से चली आ रही है। तारीख पर गवाही देने के लिए लोग दूर-दूर से अदालत आते हैं। गवाही न होने पर उन्हें परेशानी व आर्थिक हानि उठानी पड़ती है। गांव से बार-बार शहर आना काफी मुश्किल हो जाता है। सरकार को चाहिए कि तुरंत प्रभाव से अदालतों में सरकारी अधिवक्ताओं की कमी दूर की जाए। संवाद