थाना परिसर में रोष प्रदर्शन करते किसान नेता।
रानियां। किसान नेताओं और विपक्षी दलों के नेताओं को शुक्रवार देर रात हिरासत में लिए जाने के विरोध में किसान मोर्चा के सदस्यों ने रानियां थाना परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने भाजपा सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा करने की मांग की।
किसान नेता हरजिंदर सिंह नानुआना ने कहा कि केंद्र सरकार जनता और युवाओं की आवाज से घबरा गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि नेताओं को रात करीब दो बजे हिरासत में लिया गया। क्या हुआ अपराधी थे? उन्होंने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी की मंशा भले ही कुछ भी हो लेकिन उन्होंने सही मुद्दे को चुना है।
पहले उन्होंने नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग के लिए संघर्ष किया और अब एसआईआर प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्रित होना था। नानुआना ने आरोप लगाते हुए कहा है कि भाजपा सरकार ने ईवीएम मशीन को हैक कर विरोधी पार्टियों के लोगों के वोट काटकर अपने लोगों के कई वोट बनाकर वोट चोरी की है।
सरकार द्वारा चुनावों में वोटों की कथित हेराफेरी और ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को पहुंचने से रोकने के लिए केंद्र सरकार ने दिल्ली के 57 मेट्रो स्टेशनों के अलावा सैकड़ों बसों और कई ट्रेनों के साथ इंटरनेट सेवाएं रोक दी।
उन्होंने मौजूदा हालात की तुलना 1984 के आपातकाल से करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने मेट्रो स्टेशन, रेल, बसें तथा इंटरनेट सेवा बंद कर लोगों को 1984 की याद दिला दी। प्रदर्शन में शामिल वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध जताना नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से आपसी मतभेद भुलाकर किसान मोर्चा के साथ खड़े होने की अपील की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान किसान संगठनों के सदस्यों के साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और क्षेत्र के कई दर्जन लोग मौजूद रहे।