फोटो - 27, 28
- शहर में रात 8:20 पर दिखा चांद, पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। अखंड सौभाग्य का पर्व करवाचौथ वीरवार को जिलेभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सुहागिनों ने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने दिनभर निर्जला व्रत रखा। महिलाओं को दिनभर चंद्रमा के निकलने का इंतजार रहा।
रात करीब 8:20 बजे चांद दिखाई देते ही महिलाओं के चेहरे खिल उठे। उन्होंने पूजा की थाली लेकर चंद्रमा के दर्शन किए। छलनी से चांद देखने के बाद उसी छलनी से पति का चेहरा निहारा। इसके बाद चंद्रदेव को अर्घ्य दिया गया। पति की दीर्घायु की कामना कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
पतियों ने पत्नियों को पानी और मिठाई खिलाकर व्रत खुलवाया। कई परिवारों में पतियों ने इस अवसर पर पत्नी को उपहार भी दिए। करवाचौथ का पर्व महिलाओं के शृंगार, धार्मिक आस्था और पारिवारिक मेलजोल का अवसर बना।
दिनभर की तैयारियों के बाद चंद्रमा के दर्शन और पूजा की रस्में पूरी हुईं। घरों में साथ बैठकर मिठाई बांटी गई और पर्व की खुशियां साझा की गईं।
पर्व की तैयारियां और उत्साह
करवाचौथ को लेकर महिलाओं में सुबह से ही खास उत्साह देखने को मिला। दिनभर व्रत रखने के बावजूद महिलाओं ने त्योहार की तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ी। घरों में साफ-सफाई और अन्य घरेलू कामकाज निपटाने के बाद महिलाएं सजने-संवरने के लिए सौंदर्य केंद्र पहुंचीं। कई महिलाओं ने हाथों पर मेहंदी लगवाई और पारंपरिक परिधानों के साथ शृंगार किया। लाल, गुलाबी और अन्य रंगों के परिधानों में सजी महिलाओं ने पर्व की रौनक बढ़ाई। घरों में भी पूजा की तैयारियां चलती रहीं। महिलाओं ने पूजन सामग्री एकत्रित की और शाम के लिए पूजा की थालियां सजाईं।
धार्मिक परंपराएं और कथा श्रवण
करवाचौथ पर धार्मिक परंपराओं का विशेष महत्व रहा। कहीं दोपहर तो कहीं शाम के समय महिलाओं ने एकत्रित होकर करवाचौथ की कथा सुनी। कथा के दौरान व्रत के महत्व और पति-पत्नी के रिश्ते से जुड़ीं कथाओं को याद किया गया। महिलाओं ने परंपरा के अनुसार पूजा की तैयारियां पूरी कीं। उन्होंने चंद्रमा के उदय होने की प्रतीक्षा की। घरों में पूजा की थालियों में दीपक, मिठाई, जल और अन्य पूजन सामग्री सजाई गई। चांद निकलने से पहले महिलाएं अपने परिवार के सदस्यों के साथ पूजा के लिए तैयार रहीं।
उत्सव का माहौल रहा
चंद्रमा के दर्शन के समय घरों की छतों, आंगनों और आसपास की गलियों में चहल-पहल बढ़ गई। कई परिवारों में महिलाएं छत पर पूजा करने पहुंचीं जबकि कुछ ने घर के आंगन में ही पूजन किया। चांद निकलने के बाद व्रत खोलने की रस्म पूरी हुई तो परिवारों में खुशी का माहौल बन गया। महिलाओं ने पूजा-अर्चना कर पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने पतियों की आरती उतारी और तिलक लगाया। परंपरा के अनुसार बायना निकालकर घर की बुजुर्ग महिलाओं को दिया गया और उनका आशीर्वाद लिया गया। व्रत खुलने के बाद परिवार के सदस्यों ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं और साथ बैठकर खुशियां साझा कीं।