संयुक्त सर्वेक्षण में फसल की स्थिति सामान्य मिली
किसानों को फेरोमोन ट्रैप और आईपीएम तकनीक अपनाने की सलाह
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। कृषि विभाग ने कपास की फसल को गुलाबी सुंडी सहित अन्य कीटों से बचाने के लिए निगरानी अभियान तेज किया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के निर्देशन में बुधवार को जिले में संयुक्त सर्वेक्षण हुआ। इसमें फसल की स्थिति सामान्य मिली और गुलाबी सुंडी का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर से कम पाया गया।
क्षेत्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन केंद्र (आरसीआईपीएमसी) फरीदाबाद और संयुक्त कृषि निदेशक (कपास), सिरसा के अधिकारियों के दल ने खेतों का जायजा लिया। किसानों को गुलाबी सुंडी सहित अन्य कीटों के प्रभावी नियंत्रण के लिए एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन (आईपीएम) तकनीकों की जानकारी दी गई।
संयुक्त कृषि निदेशक डॉ. आत्मा राम गोदारा ने बताया कि फेरोमोन ट्रैप गुलाबी सुंडी की निगरानी और नियंत्रण में काफी कारगर साबित हो रहे हैं। अनेक किसानों ने इनके परिणामों को देखते हुए अपने खेतों में अधिक संख्या में ट्रैप लगाए हैं।
आरसीआईपीएमसी फरीदाबाद और कृषि विभाग ने हरियाणा के सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, हांसी, भिवानी, चरखी दादरी और जींद जिलों में करीब 120 फेरोमोन ट्रैप लगाए हैं। इनका उद्देश्य कपास की फसल में कीटों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखना है। सर्वेक्षण टीम ने किसानों को नियमित निगरानी और वैज्ञानिक तकनीक अपनाने की सलाह दी।
सर्वेक्षण दल में आरसीआईपीएमसी फरीदाबाद से सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी डॉ. लक्ष्मी कांत, डॉ. केपी शर्मा, सुरजीत बर्मन और संयुक्त कृषि निदेशक (कपास) सिरसा के तकनीकी सहायक डॉ. रोबर्ट रोबिनसन सहित कृषि विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
कीट नियंत्रण के उपाय
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को गुलाबी सुंडी की समय रहते पहचान और नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी। इसके अलावा रस चूसने वाले कीटों की निगरानी के लिए प्रति एकड़ 20 पीले या नीले स्टिकी ट्रैप लगाने को कहा गया। अधिकारियों ने बताया कि ट्रैप के माध्यम से खेतों में कीटों की संख्या का सही आकलन किया जा सकता है। इससे जरूरत के अनुसार ही नियंत्रण उपाय अपनाए जा सकेंगे और अनावश्यक कीटनाशकों के प्रयोग पर रोक लगेगी।
एनपीएसएस एप की जानकारी
विशेषज्ञों ने किसानों को एनपीएसएस मोबाइल ऐप के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस एप के माध्यम से किसान फसल में लगने वाले कीट एवं रोगों की पहचान कर वैज्ञानिक सलाह प्राप्त कर सकते हैं। इससे समय रहते उचित निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।