पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस जसवंत सिंह ने शुक्रवार देर शाम जिला जेल का निरीक्षण कर पौधारोपण किया। इस मौके पर उन्होंने कैदियों और हवालातियों की समस्याएं सुनीं।
उन्होंने इस निरीक्षण के दौरान जेल में कैदियों से भी मुलाकात, बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनी। इनके साथ जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिमलेश तंवर, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सतीश कुमार, जेल अधीक्षक अमित भादू सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। जस्टिस जसवंत सिंह ने कहा कि ऐसे कैदी जो कोर्ट में अपने मामले की अपील करना चाहते हैं, उन्हें कोर्ट फीस व वकील की फीस भी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से दी जाए।
कैदियों को उनके अधिकारों की जानकारी देने के लिए समय-समय पर जेल में कानूनी जागरूकता शिविर लगाए जाएं, जिसमें पैनल बोर्ड के वकील उन्हें उनके अधिकारों की जानकारी देें। कोई भी कैदी कानूनी सेवाएं उपलब्ध करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों से मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि जेल प्रशासन सुनिश्चित करें कि कोई भी सजायाफ्ता कैदी जेल में मोबाइल इत्यादि का प्रयोग न करें और न ही मोबाइल रखे। अगर कैदी के पास से मोबाइल फोन मिलता है, इसे जेल प्रशासन की लापरवाही ही माना जाएगा। कैदी घर में पत्राचार कर सकते हैं।
पत्राचार के लिए कागज व टिकट आदि की सुविधा भी जेल प्रशासन को मुहैया करवानी होगी। उन्होंने कहा कि पत्राचार में लिखे मजबून को जेल अधीक्षक पढ़ सकता है, जिससे जेल अधीक्षक यह सुनिश्चित करें कि पत्र में राष्ट्र और अन्य सुरक्षा तथा संवेदनशील विषयों के बारे में विवरण न लिखा हुआ हो।
इसके साथ रेडियो सुनने, टेलीविजन देखने की सुविधा भी जेल प्रशासन को कैदियों के लिए मुहैया करवानी होगी। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक शिक्षा का अधिकार भी सभी कैदियों को है। कोई भी कैदी जेल परिसर में यह सुविधा उपलब्ध कर सकता है। जिला जेल के भोजनालय, चिकित्सालय, सुरक्षा रूम का भी निरीक्षण किया।