संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शहर के पंचायत भवन में खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने नशा मुक्ति हरियाणा मुहिम के तहत कार्यक्रम करवाया। इसमें बतौर मुख्य अतिथि संयुक्त सचिव हेल्थ योगेश मेहता ने शिरकत की।
उन्होंने कहा कि किशोरावस्था ऐसी अवस्था है, जिसमें चरित्र निर्माण होता है। इस दौरान कुछ किशोर और छात्र गलत संगत में पड़ कर अपना जीवन बर्बाद कर लेते हैं। शौकिया तौर पर शुरू नशे का सेवन जीवन को बर्बाद कर देता है। उन्होंने कहा कि मेडिकल का बढ़ता नशा बेहद चिंतनीय है और इसे रोकने के लिए हर नागरिक को अपनी जिम्मेवारी ईमानदारी निभानी होगी तभी हम एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकेंगे। नशे को एक बुराई न समझ कर इसे बीमारी की तरह व्यवहार करें और पीड़ित का उपचार करवाएं। संयुक्त सचिव हेल्थ योगेश मेहता ने कहा कि युवा कॉलेज के समय में नशे की ओर जाता है। युवाओं को नशे से बचाने के लिए पहले हमें खुद को बदलना होगा, फिर समाज को बदला जा सकता है। इसके लिए सभी वर्गों को एक मंच पर आना होगा, क्योंकि सजग लोगों का चुप रहना नशा अंकुश के लिए घातक होता है। प्रदेश सरकार द्वारा नशा मुक्ति के लिए गंभीरता से कार्य किए जा रहे हैं और जिला व पुलिस प्रशासन द्वारा भी विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को शिक्षा के साथ-साथ खेलों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में जिला के मेडिकल संचालकों, पंच-सरपंचों ने भाग लिया। इस अवसर पर डीएसपी धर्मवीर, जिला औषधि नियंत्रक डॉ. रजनीश धानीवाल, डॉ. पंकज, डीसीओ दिनेश राणा, एनसीबी इंचार्ज गणेश कुमार, कृष्ण कुमार, एसडीसीओ रमन श्योराण, डॉ. गिरीश भी मौजूद थे।
नशा करने वाले की चेतना हो जाती है शून्य : तनेजा
राज्य औषधि नियंत्रक मनमोहन तनेजा ने कहा कि नशा करने वाला व्यक्ति की चेतना सामाजिक तौर पर शून्य हो जाती है। नशीले पदार्थों के उपयोग से न सिर्फ व्यक्ति के मानसिक संतुलन पर दुष्प्रभाव पड़ता है, बल्कि वह भयंकर बीमारियों से भी ग्रस्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन सदैव उन लोगों के साथ खड़ा है, जो इस खतरे से लड़ रहे हैं और नशा छोड़ना चाहते हैं। नशे की लत से पीड़ित व्यक्ति समाज और राष्ट्र निर्माण में योगदान नहीं दे पाता। नशाखोरी के कारण व्यक्ति चोरी, आत्महत्या व अन्य अपराधों से जुड़ जाता है। इसलिए हम सबको मिलकर इस कुरीति को समाप्त करना होगा। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों की समस्या से निपटने के लिए साक्ष्य आधारित रोकथाम, उपचार एवं देखभाल को यकीनी बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। इसी उद्देश्य से नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र नशे से पीड़ित व्यक्तियों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों के साथ अधिक से अधिक समय बिताएं, उनकी समस्याएं सुने और उनसे मैत्रीपूर्ण व्यवहार रखें। नशे के लक्षण नजर आने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र नशा मुक्ति अथवा पुनर्वास केंद्र में जाकर परामर्श लें।