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जेएनयू में हुई हिंसक घटना को लेकर छात्र संगठनों ने सौंपा एसडीएम को ज्ञापन

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jnu - फोटो : Sirsa
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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में हुई हिंसक घटना को लेकर सोमवार को सभी छात्र संगठनों व जन संगठनों ने इसके विरोध राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। वहीं दूसरी ओर नेशनल कालेज के बाहर एबीवीपी छात्र संगठन ने वामपंथियों के विरोध में पुतला फूंका।
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जेएनयू में हुई हिंसक घटना के विरोध में इकट्ठा हुए संगठनों ने बस स्टैंड से लेकर लघु सचिवालय तक एबीवीपी व सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। छात्र संगठनों व जन संगठनों ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि जेएनयू में फीस बढ़ोतरी को लेकर आंदोलन चला हुआ है। आंदोलन को लेकर जेएनयू प्रशासन व सरकार इसकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है। आंदोलन के चलते दिल्ली पुलिस की शह पर जेएनयूएसयू की अध्यक्ष आइशी घोष और छात्रों पर जानलेवा हमला किया गया है। जो दिल्ली के एम्स अस्पताल के ट्रामा सेंटर में भर्ती है। नकाबपोश लोगों ने हॉस्टलों में जाकर भी तोड़फोड़ की है। उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है घटना की निष्पक्ष जांच हो और इसमें जो भी दोषी लोग हैं, उन्हें सजा दी जाए। नौजवान भारत सभा के सदस्य कुलविंद्र सिंह रोड़ी ने बताया कि जेएनयू में हुई हिंसक घटना फीस बढ़ोतरी को लेकर चल रहे आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश है। जेएनयू के विद्यार्थी अपनी मांग को लेकर आंदोलन पर हैं और कहीं न कहीं वह मांग सही भी है। करीब दो महीने से चल रहे आंदोलन को ध्वस्त करने में जब जेएनयू प्रशासन और सरकार असफल रही तो वह अब आंदोलन पर बैठे विद्यार्थियों पर हिंसक हो रही है। इस हिंसक घटना के बाद नकाबपोशों की पुलिस के साथ सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रही है। यह कहीं न कहीं संकेत देती है कि पुलिस प्रशासन व नकाबपोश मिले हुए हैं। इस मौके पर एसएफआई हरजीत सिंह, सुरेंद्र, कुलदीप, मनजीत, सोमिया, हमजिंद्र, महिला जनवादी संघ से डॉ. बलबीर गांधी व सर्व कर्मचारी संघ से मदनलाल खोत उपस्थित थे।
नेशनल कॉलेज के बाहर एबीवीपी ने वामपंथियों का पुतला फूंका
वहीं नेशनल कॉलेज के एबीवीपी छात्र संगठन ने जेएनयू में हुए वामपंथी छात्रों द्वारा की गई गुंडागर्दी के विरोध में नेशनल कॉलेज के गेट के सामने वामपंथियों का पूतला फूंका। संगठन सदस्य बलराम, रवि छिंपा, सुमित कुमार, रोहित व योगेेश जाखड़ का कहना है कि जेएनयू के आंदोलन पर बैठे विद्यार्थियों के ऊपर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हैं। विद्यार्थी अपने हक को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। वामपंथियों ने उन्हीं विद्यार्थियों को निशाना बनाया है। जो इस आंदोलन में सक्रिय हैं। सरकार को छात्रों पर हमला करने वाले वामपंथियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
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