माई सिटी रिपोर्टर
सिरसा। आधुनिकता के इस दौर में जब मानवीय मूल्य मतलब के हो गए हैं। इस दौरान जसपाल सिंह अपने साथियों के उन प्राणियों के दुख दर्द के साथी बने हैं, जिनको स्वार्थ सिद्ध होने के बाद लोगों ने तड़प-तड़प कर मरने के लिए छोड़ दिया। हिसार रोड पर एक ऐसी ही बेसहारा व घायल पशु-पक्षियों का आश्रम, जहां पर उन पशु-पक्षियों को रेस्क्यू कर लाया जाता है, जिनको मरने के छोड़ दिया जाता है।
आश्रम के संचालक जसपाल व उनके साथी ऊंट, घोड़ी धन्नो और पाकिस्तानी बुल्ली आदि का उपचार कर चुके हैं। छह साल पहले शुरू हुई संस्था की तरफ से हिसार रोड पर आश्रम बनाया गया है, जहां पर चोटिल और बीमार पशु-पक्षियों को ठीक किया जाता है। जसपाल ने बताया कि उनकी इस मुहिम को आगे बढ़ाने में 8-10 युवा सहयोग कर रहे हैं। जिनमें राकेश, स्कूल में फुटबाल कोच अंकुश, दसवीं कक्षा का विद्यार्थी कशिश है। यहां पर वे रेस्क्यू कर लाए गए जीवों की मरहम पट्टी करते हैं और उनके दर्द को कम करने का काम करते हैं। इस काम में पशु चिकित्सक प्रजापत का विशेष सहयोग रहता है।
जब सड़क किनारे ऊंट को किया रेस्क्यू
अंकुश ने बताया कि फतेहाबाद के अयाल्की गांव में किसी ने ऊंट को ऐसे ही बेसहारा छोड़ दिया। वे किसी पशु को रेस्क्यू करने के लिए जा रहे थे, तब उन्होंने सड़क किनारे पड़े इसे देखा। ऊंट के आगे के दोनों पैर खराब हो चुके थे। पेट के नीचे हिस्से में कीड़े पड़े हुए थे। इसके बाद वे रेस्क्यू कर इसे आश्रम में लाए और उसका उपचार शुरू किया।
घोड़ी धन्नो और पाकिस्तानी बुल्ली का किया उपचार
अंकुश ने बताया कि सूरतगढि़या बाजार में लोहे की प्लेट ले जाते समय घोड़ी धन्नो घायल हो गई। इसके पैर खराब हो गए थे। इसके बाद उन्होंने इसे रेस्क्यू किया। अब यह धीरे-धीरे ठीक हो रही है। इसी तरह पाकिस्तानी बुल्ली की टांग में कैंसर हो गया था। इसे बचाने के लिए इसकी टांग काटनी पड़ी। यह काफी दोस्तान व्यवहार का है। यहां घूमने वाले पशु-पक्षियों को यह कुछ नहीं कहता।
कुतिया के पिछले हिस्से पर चढ़ा गई गाड़ी
किसी लापरवाह चालक ने कुतिया के पिछले हिस्से पर गाड़ी चढ़ा दी। इसके कारण यह चलने फिरने में लाचार हो गई। ऊपर से यह गर्भवती। इसे ब्याहे हुए 6-7 दिन हो गए हैं। इसके 6 बच्चे हैं। इस कुतिया का उपचार किया जा रहा है।
कोई भी जुड़ सकता है संस्था से
जसपाल के अनुसार वे काफी पहले से पशु-पक्षियों के लिए काम कर रहे हैं। एनिमल एंड बर्ड्स वेलफेयर नाम से संस्था को पंजीकृत हुए करीब 6 साल हुए हैं। इस संस्था ने चोटिल और बीमार पशु-पक्षियों के इलाज का बीड़ा उठाया है। संस्था की तरफ से हिसार रोड पर आश्रम बनाया गया है, जहां पर चोटिल और बीमार पशु-पक्षियों को ठीक किया जाता है। इस संस्था से कोई भी सेवा कार्य के लिए जुड़ सकता है।