जाट आरक्षण को लेकर राष्ट्रीय व राजकीय मार्गों पर जाम लगाने वाले
प्रदर्शनकारियों पर प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। जो लोग सड़कों पर
जाम लगाकर बैठे रहे उसकी पहचान के अलावा उन लोगों का भी पता लगाया जा रहा
है जो जाम लगवाने के लिए उकसाने के काम में जुटे थे।
शुरूआत में पुलिस ने
रास्ता जाम करके आमजन को परेशान करने के आरोप में 17 नामजद व सैकड़ों अन्य
प्रदर्शनकारियों पर केस दर्ज किया है। इंटेलिजेंस एजेंसियां भी तमाम
प्रदर्शनकारियों की पहचान करने में लग चुकी हैं। पूर्व मुख्यमंत्री के
राजनीतिक सलाहकार रहे प्रो. वीरेंद्र सिंह का आंदोलन से जुड़ा ऑडियो सामने
आने के बाद से चारों ओर सिरसा मुख्य चर्चा में आया हुआ है। इसीलिए सिरसा
में हुए आंदोलन और इसमें शामिल रहे लोगों की पूरी रिपोर्ट तैयार की जा रही
है।
जानकारी के अनुसार प्रदेश में जाट आरक्षण को लेकर आंदोलन की शरुआत 15 फरवरी
से हिसार के मय्यड़ से हुई थी। सिरसा को छोड़ अन्य जिलों में प्रदर्शनकारी
सड़कों व रेल ट्रैक पर बैठे थे। सिरसा में शांति रही लेकिन 18 फरवरी को
जाटों की बैठक पुराना बस अड्डा स्थित जाट धर्मशाला में हुई।
इस बैठक में
सिरसा में भी आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन की शुरुआत करने की रणनीति बनाई
गई। 19 फरवरी को जाटों ने सड़कों पर प्रदर्शन किया और लघु सचिवालय पहुंचकर
उपमंडलाधीश परमजीत चहल को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद जाटों ने जिलेभर के
शिक्षण संस्थानों को बंद करने व सड़कों पर जाम लगाने का ऐलान किया।
20
फरवरी को एक बार फिर जाट धर्मशाला में बैठक हुई। इसके उपरांत जाटों ने
प्रदर्शन करते हुए सिरसा से होकर पंजाब जाने वाले नेशनल हाईवे नौ पर दिल्ली
पुल के पास जाम लगाकर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।
नेशनल हाईवे को बाधित
करने के उपरांत सिरसा अरनियांवाली रोड, बकरियांवाली रोड, नेजिया, आठवां
मील, जमाल रोड, जोगीवाला, कागदाना, डबवाली रोड स्थित घग्घर पुल, बरनाला रोड
स्थित फरवाई व नेजाडेला कलां के बीच, माधोसिंघाना, पोहड़कां, पन्नीवाला
मोटा व नुहियांवाली में जाम लगाकर सिरसा जिले का संपर्क चारों तरफ से काट
दिया। जिससे आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। 22 फरवरी सोमवार
को आंदोलनकारियों ने सड़कों से जाम हटाया।
कप्तान से किसने की सिरसा में बात!
पूर्व सीएम के सलाहकार रहे प्रो. वीरेंद्र सिंह और कप्तान सिंह के बीच हुई
बातचीत वाले ऑडियो में सिरसा तक आंदोलन की आंच पहुंचाने का जिक्र सामने आया
है। इससे यह पता चल रहा है कि सिरसा में आंदोलन छेड़ने के पीछे किसकी
भूमिका ज्यादा रही और इसी का पता लगाने में इंटेलिजेंस एजेंसी जुटी चुकी
है।
आंदोलन की शुरूआत होने के चार दिन बाद तक सिरसा जिला इससे अछूता रहा।
जिले में शांति का माहौल बना हुआ था। ऑडियो में कप्तान सिंह प्रो. वीरेंद्र
से बातचीत करके सिरसा में आंदोलन शुरू करवाने की बात बोल रहा है। ऐसे में
इस बात की प्रबल संभावना है कि सिरसा को भी आंदोलन की जद में जानबूझ कर
लाया क्या न कि यहां के लोगों ने अपनी इच्छा से इसे किया।
यह भी पता चला है
कि स्थानीय जाटों को यह बात बोली गई कि अन्य जिलों में आंदोलनरत जाट सिरसा
के जाटों के बारे में ..... यह बोल रहे हैं और वो यहां आकर उन्हें ......
पहनाएंगे। इंटेलिजेंस इसका पता लगा रही है कि कप्तान सिंह ने सिरसा में किस
शख्स से बातचीत की। जिसके बाद शांत प्रिय जिले में शुमार सिरसा में आंदोलन
की आंच पहुंची। फिलहाल जांच का मुख्य केंद्र जाट धर्मशाला बनी हुई है।
इन लोगों पर दर्ज हुए केस
पुलिस ने मार्गों को बाधित करने के आरोप में शिशपाल झोरड, धर्मपाल नैन,
विरेंद्र न्यौल, विक्ल पचार, विनोद ढाका, श्रवण डूडी, गिरधारी बीसू, ओम
प्रकाश न्यौल, कृष्ण जोधकां, लाल चंद, दलीप कुमार, मोहन साहू, रणधीर
जोधकां, कश्मीर सिंह, दौलत राम सहारण, नीकू राम खिचड़ सहित सैकड़ों अन्य
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत अभियोग दर्ज किया
है।