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Sirsa News: धान की खरीद में गड़बड़झाला, मंडी में बोली बंद, निजी केंद्रों पर औने-पौने दामों में खरीद रहे शेलर

Sun, 10 Nov 2024 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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 रानियां में बाईपास पर चल रहा धान खरीद का कार्य।   संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सिरसा। जिले में धान की खरीद में गड़बड़झाला देखने को मिल रहा। सिरसा की अनाज मंडी में जहां धान की आवक ज्यादा होने के हवाला देकर आढ़तियाें ने खरीद बंद कर रखी है वहीं, रानियां बाइपास को शेलर ने अपना नया ठिकाना बनाया लिया है। खाली भूखंडों में अस्थायी खरीद केंद्र बनाकर शेलर औने-पौने दामों में किसानों की फसल खरीद रहे हैं। आढ़ती और अधिकारी मिलकर यह सब खेल खेल रहे हैं।
अनाजमंडी में धान डालने के लिए व्यवस्था नहीं होने के चलते आढ़तियों ने रविवार तक किसानों को धान न लेकर आने की अपील की है। किसानों को व्यवस्था मुहैया करवाने के नाम पर किए गए बंद का लाभ शेलर उठा रहे हैं। रानियां बाइपास रोड पर दो दिनों के अंदर बड़े-बड़े गोदाम तैयार कर लिए हैं। खाली प्लाटों में अस्थायी खरीद केंद्र बनाकर औने-पौने दामों में किसानों की फसल खरीद रहे हैं। किसानों को नमी के नाम पर डराकर भी सस्ते दामों पर धान खरीदने का मामला सामने आया है।
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अधिकारियों की जानकारी में होने के बाद भी शेलर खाली-भरी के नाम पर सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं। डबवाली- रानियां रोड पर खुलेआम खरीद की जा रही है। बाइपास पर औद्योगिक क्षेत्र में धड़ल्ले से धान की आवक को सुखाया जा रहा है। अधिकारी आंखें बंद किए हुए बैठे हैं। अभी तक धान के सीजन में अधिकारी किसान की शिकायत का इंतजार कर रहे हैं। अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अभी तक मंडी से करीब छह लाख से ज्यादा धान के बैग की उठान होनी बाकी है। अधिकारियों का दावा है कि खरीदे गए धान की 50 प्रतिशत उठान हो चुकी है।


रानियां बाइपास बना निजी खरीद का केंद्र
रानियां-डबवाली रोड पर दो प्राइवेट परचेजर खुले में किसान के धान को खरीद रहे हैं। एक ने जहां पक्के फर्श की व्यवस्था और अन्य सुविधा दी हुई है, वहीं, दूसरा कच्चे जगह पर ही धान को डलवा रहा है। बिना सफाई के धड़ल्ले से बैगों में धान भरा जा रहा है। मंडी से ज्यादा तेजी से इन जगहों से शेलर धान की उठान करवा रहे हैं। जब इनसे पूछा गया तो बोले- हमने थोड़ी न बोली बंद करवाई है। कुछ आढ़तियों ने अपने चक्कर में बंद करवाई है। इसी रूट पर बाइपास पर चढ़ने के साथ ही एक खाली पड़े प्लांट में मजदूर धान डालकर झार लगवा रहे थे। इससे कुछ आगे गए तो औद्योगिक क्षेत्र में बड़े स्तर पर किसानों से पीआर धान खरीदकर सुखाया जा रहा था। जब खरीदारों से पूछा तो जवाब दिया कि किसानों का धान है। मंडी में जगह नहीं है तो यहां सूखा रहे हैं। जबकि सभी ढेरियों को एक साथ मिलकर सुखाने का काम जारी था। इससे पता चलता था कि किसानों का धान है या परचेजर का। इससे कुछ दूरी पर ही इंडस्ट्री के बीचों बीच दो गोदामों में धान की भराई का काम जारी था। हैरानी की बात है कि मार्केट कमेटी के अधिकारियों की जिम्मेदारी होने के बाद भी वह कार्यालयों से बाहर नहीं आ रहे हैं।
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वर्जन


मंडी में खरीद का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है। उपज लेकर आने वाले किसानों के टोकन काट रहे हैं। मंडी बंद नहीं की गई है। मंडी में जगह नहीं होने पर उपज को सुखाकर लाने की सलाह आढ़तियों व किसानों को दी गई है। कुछ आढ़तियों ने बाहर की खरीद की अनुमति मांगी है। यदि बड़े स्तर पर ऐसा हो रहा है, तो मौके का निरीक्षण करेंगे।
- वीरेंद्र मेहता, मार्केट कमेटी सचिव।
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