एडीजीपी के जनसंवाद कार्यक्रम में मेडिकल नशा बिकने के मामले सामने आने के बाद औषधि नियंत्रक विभाग की ओर से निरंतर मेडिकल स्टोर पर कार्रवाई की जा रही है। पिछले तीन-चार दिनों से मेडिकल स्टोर पर छापामार कार्रवाई जारी है। शुक्रवार को भी पुलिस और औषधि नियंत्रक विभाग की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए रानियां रोड पर स्थित अनु मेडिकल पर छापामार कार्रवाई की। जांच में बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित दवाइयां मिली। जिनका खरीद-बेच का कोई भी रिकॉर्ड नहीं मिला। विभाग ने इसे सील कर दिया। जबकि मेडिकल पर फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति में ही दवाइयां बेची जा रहीं थीं।
जानकारी के अनुसार औषधि नियंत्रक विभाग व एडीजीपी की टीम को सूचना मिली थी कि रानियां रोड पर स्थित अनु मेडिकल स्टोर पर नशे में प्रयुक्त होने वाली दवाइयों को सरेआम बेचा जा रहा है। जिसके बाद औषधि नियंत्रक डॉ. रजनीश धालीवाल और एडीजीपी की टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। टीम की ओर से करीब दो घंटे तक यहां पर दवाइयों को खंगाला गया और रिकॉर्ड जांचा गया। जिसके पश्चात यहां पर दो प्रकार की नशे में प्रयुक्त होने वाली दवाइयां बरामद हुई। वहां पर उपस्थित कर्मचारी से पूछताछ की गई तो वह कोई भी जवाब नहीं दे पाया और इन दवाइयों के खरीद व बेचने संबंधित कोई भी दस्तावेज बरामद नहीं हुआ। वहीं मौके फार्मासिस्ट भी नहीं मिला और सेल्स मैनेजर ही दवाइयों को बेच रहा था। जिसके पश्चात टीम ने मेडिकल को सील कर दिया ।
जांच पूरी होने के बाद पहुंची फार्मासिस्ट, वह भी नहीं दे पाई रिकॉर्ड
टीम की ओर से कार्रवाई किए जाने की सूचना मिलने के बाद फार्मासिस्ट को सूचित किया गया और मौके पर बुलाया गया। जांच पूरी होने के बाद फार्मासिस्ट अनु मौके पर पहुंची। लेकिन वह भी नशे में प्रयुक्त होने वाली प्रतिबंधित दवाइयों का रिकॉर्ड पेश नहीं कर पाई। वहीं औषधि नियंत्रक डॉ. रजनीश धालीवाल ने बताया कि अगर यही दवाइयां रिकॉर्ड व डॉक्टर की पर्ची के अनुसार बेची जाए तो कोई भी व्यक्ति इन दवाइयों का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकता। लेकिन मेडिकल संचालक अपनी मर्जी से ही गोलियां बेच रहे हैं। जोकि गलत है।