बच्चे को जन्म देने के साथ ही मां द्वारा अपने परिजनों के साथ मिलकर उसे बेच देने का मामला सामने आया है। इस मामले की सुनवाई करते हुए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट आशुतोष ने सिविल लाइन थाना पुलिस को आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश शुक्रवार को जारी कर दिया। आरोप है कि पत्नी ने बच्चे को जन्म देने के बाद पति को सूचना पहुंचाई की जन्म लेने के कुछ समय बाद ही बच्चा मर गया। पति ने पड़ताल की तो उसे पता चला कि उसकी पत्नी ने ससुराल वालों के साथ मिलकर उसका बच्चा 21 हजार रुपये में किसी को बेच दिया।
पति ने थाने में जाकर शिकायत दी लेकिन पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की। इसके बाद पिता ने न्याय के लिए न्यायालय का द्वार खटखटाया। न्यायालय में दायर किए इस्तगासे में शिव नगर निवासी संजीव कौशल ने बताया कि उसकी शादी 13 अगस्त 2022 को प्रियंका पुत्री राजू पेंटर निवासी चतरगढ़पट्टी के साथ हुई थी। प्रियंका की पहली शादी सुरेंद्र निवासी फरवाई कलां के साथ हुई थी। सुरेंद्र की मृत्यु होने के बाद दोनों परिवारों की सहमति से उसकी शादी हुई। शादी के दो माह बाद प्रियंका गर्भवती हो गई। संजीव कौशल अपनी पत्नी को समय-समय पर जांच के लिए नागरिक अस्पताल ले जाता था। प्रियंका के माता-पिता उससे पैसे की डिमांड करते थे, संजीव ससुराल वालों को गरीब समझ कर उन्हें अक्सर पैसे देता रहता था। अप्रैल 2023 को अचानक संजीव के भाई गुलशन की तबीयत खराब हो गई।
इसके बाद संजीव अपने भाई को उपचार के लिए एम्स में ले गया। ससुराल वाले उसका फोन नहीं उठा रहे थे। प्रियंका की डिलीवरी के बारे में सास लगातार पता करती रहती थी। इसी बीच प्रियंका से बात हुई तो उसने बताया कि 6 जुलाई 2023 को सिरसा के होली नर्सिंग होम में डिलीवरी हुई थी। बेटा पैदा हुआ था लेकिन घर आने के बाद बच्चे की मौत हो गई। पड़ताल करने के लिए संजीव होली नर्सिंग होम में गया तो वहां उसे पता चला कि प्रियंका की डिलीवरी सामान्य हुई थी और मां व बच्चे दोनों स्वस्थ थे, इसके बाद दोनों को छुट्टी दे दी गई थी। संजीव कौशल ने पड़ताल को आगे बढ़ाया तो पता चला कि बच्चे की मृत्यु नहीं हुई है। प्रियंका ने ससुराल वालों के साथ मिलकर बच्चे को पहले पति का बताकर उसे बेच दिया।
इसके बाद संजीव ने 17 अगस्त 2023 को पुलिस अधीक्षक को शिकायत भेजी। न्यायालय ने सिविल लाइन थाना पुलिस को आरोपी पत्नी प्रियंका सहित 6 नामजद व अन्य के खिलाफ धारा 80/61 जेजे एक्ट 2015, 420/406/506/120 बी आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
ससुराल वालों ने दी थी धमकी
पड़ताल करने पर संजीव को यह पता चला कि उसकी पत्नी ने फर्जी गोदनामा बनाकर बच्चे को 21 हजार में बेचा है। ससुराल वालों की ओर से उसे धमकी दी गई कि वह बच्चे को भूल जाए नहीं तो अंजाम अच्छा नहीं होगा। संजीव ने मोबाइल पर सारी बात की रिकॉर्डिंग कर ली। ये रिकॉडिंग लेकर संजीव पुलिस थाने गया तो पुलिस ने उसकी एक न सुनी। न्यायालय को संजीव ने बताया कि वह 6 दिनों तक सबूत के साथ पुलिस के पास जाता रहा लेकिन पुलिस वाले कुछ सुनने को तैयार ही नहीं हुए। उसने न्यायालय को बताया कि उसे लगातार धमकियां मिल रही हैं।
कोर्ट के फैसले से मुझे इंसाफ मिलने की उम्मीद है। मुझे बस मेरा बेटा चाहिए, जिसे मेरी पत्नी व उसके घरवालों ने बेच दिया और मुझे कहा कि बच्चा जन्म लेने के बाद मर गया। आरोपियों की ओर से मुझे 60 हजार रुपये लेने का ऑफर दिया गया है। मुझे पैसा नहीं अपना बच्चा चाहिए और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
संजीव कौशल, पीड़ित पिता।