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Sirsa News: ग्वार की फसल में बढ़ा चारकोल रोट बीमारी का प्रकोप

Tue, 08 Sep 2026 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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सिरसा में ग्वार विशेषज्ञ ने किसानों को दवाओं व उपचार की जानकारी देते हुए। 
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सिरसा। जिले में मौसम में बढ़ी नमी और असंतुलित तापमान के कारण ग्वार की फसल में चारकोल रोट बीमारी का प्रकोप बढ़ गया है। ओढ़ां, रानियां, सिरसा और नाथूसरी चौपटा खंड के कई गांवों में इसके लक्षण दिखाई दे रहे हैं। कम बारिश के चलते किसानों को ग्वार की अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, जिससे अब उनकी चिंता बढ़ गई है।
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कृषि विशेषज्ञ खेतों में पहुंचकर किसानों को रोग की पहचान, रोकथाम और उपचार के संबंध में जानकारी दे रहे हैं। गांव खेड़ी में एटीएम नाथूसरी चौपटा डॉ. मदन सिंह और ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बी.डी. यादव के सहयोग से जागरूकता शिविर आयोजित हुआ। इसमें 56 किसानों ने भाग लिया। डॉ. यादव ने बताया कि 60 से 70 दिन की ग्वार फसल में चारकोल रोट के मामले अधिक हैं।
मौसम में नमी और तापमान में असंतुलन रोग के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना रहे हैं। जिन किसानों ने समय पर फफूंदजनित रोगों से बचाव के लिए दवा का छिड़काव नहीं किया, उनके खेतों में बीमारी का प्रकोप अधिक है। समय पर दवा प्रयोग करने वाले किसानों के खेतों में इसका असर कम दिखा।
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रोग की शुरुआत में पौधे के तने के ऊपरी हिस्से पर हल्के निशान दिखते हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज करने पर तना काला पड़ने लगता है और बढ़वार प्रभावित होती है।

रोग की पहचान और उपचार
शुरुआती अवस्था में किसानों को टेट्राकोनाजोल 3.8 प्रतिशत का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई। डॉ. यादव ने बताया कि पहले छिड़काव के करीब 10 दिन बाद दूसरा छिड़काव किया जा सकता है। इसमें कार्बेन्डाजिम 12 प्रतिशत प्लस मैनकोजेब 63 प्रतिशत का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से प्रयोग करें। इससे रोग नियंत्रित होता है और अनुकूल परिस्थितियों में पौधे में नई बढ़वार भी शुरू हो सकती है। उन्होंने किसानों से खेतों की नियमित निगरानी करने का आह्वान किया। शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उपचार करने को कहा।
जागरूकता शिविर की गतिविधियां
शिविर के दौरान किसानों को फसल में रोगों की पहचान के बारे में बताया गया। दवाओं के सुरक्षित प्रयोग के संबंध में भी जानकारी दी गई। मौजूद किसानों को चार-चार स्ट्रेप्टोसाइक्लिन के पाउच वितरित किए गए। दवाओं के छिड़काव के दौरान सुरक्षा के लिए मास्क भी दिए गए। ये मास्क हिंदुस्तान गम एंड केमिकल्स, भिवानी की ओर से प्रत्येक किसान को दिए गए।प्रशिक्षण शिविर को सफल बनाने में पंडित बुधराम का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर शिशपाल, सुभाष, मेहरचंद, प्रहलाद, सुरेंद्र, सुखदेव, महेंद्र सिंह ज्याणी, कृष्ण ज्याणी, अशोक पूनिया, अजय पूनिया, आत्माराम, मखन सिंह और ओमप्रकाश सहित अन्य किसान मौजूद रहे। इन किसानों ने शिविर में सक्रिय रूप से भाग लिया।
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