सिरसा। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से स्थानीय जिला कारागार में कैदियों के सर्वांगीण विकास के लिए विलक्षण योग और ध्यान साधना शिविर का आयोजन किया गया। इसमें स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि युवा वर्ग के पास भौतिक सुख सुविधाएं तो हैं, परंतु मानसिक शांति न होने के कारण वह चिंता एवं अवसाद से मुक्ति के लिए नशे में फंस कर अपनी चारित्रिक शक्ति और नैतिक मूल्यों का ह्रास कर रहा है।
नशे की परिभाषा देते हुए स्वामी ने बताया कि जिसमें तनिक भी शांति नहीं, वही नशा है। उनके अनुसार अवसाद से मुक्ति का उपाय नशा नहीं बल्कि इस मानसिक व्याधि को खत्म करने के लिए आत्मिक शक्ति के विकास की आवश्यकता है। हमारे राष्ट्र भक्तों ने राष्ट्र भक्ति का नशा किया और चारित्रिक विकास से ओतप्रोत हो भारत माता को स्वतंत्रता दिलाई।
उन्होंने चरित्र भारत भूमि का आधार है और आज उसी धर्म भूमि भारत में अधिकतर युवा शक्ति का चारित्रिक पतन हो रहा है। आवश्यकता है कि युवाओं को ब्रह्मज्ञान की शक्ति से जाग्रत होकर राष्ट्र में अग्रगण्य भूमिका निभाने की। आज के युवाओं के आदर्श यदि स्वामी विवेकानंद, शिवाजी, दयानंद सरस्वती, चाणक्य इत्यादि होंगे तो भारत को फिर से जगतगुरु के पद पर आसीन किया जा सकता है।
उन्होंने कैदी बंधुओं को उनके शारीरिक मानसिक और आत्मिक उत्थान के लिए योग के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि आत्म जाग्रति से आत्म सुधार की यात्रा ही विलक्षण योग है। उन्होंने कैदी बंधुओं को ताड़ासन, ब्रह्मचर्य आसन, वीर भद्रासन, पाद चालन, स्कंध चालन, नाड़ी शोधन प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, सीत्कारी प्राणायाम इत्यादि यौगिक क्रियाओं का विधिवत अभ्यास कराया।
उन्होंने कारागार परिसर में पौधरोपण भी किया। कार्यक्रम में कारागार अधीक्षक जसवंत सिंह व उप अधीक्षक मोहन सिंह की भी सहर्ष उपस्थिति रही। इस अवसर पर चरित्र रक्षण करने और नैतिक मूल्यों से ओतप्रोत होने के लिए स्वामी ने युवा शक्ति को जागरूक किया। कार्यक्रम के अंत में कारागार अधीक्षक जसवंत सिंह ने संस्थान का राष्ट्र विकास के लिए चलाए जा रहे सामाजिक प्रकल्पों के लिए आभार व्यक्त किया।