भीवां में स्कूल के बाहर रोष प्रदर्शन करते ग्रामीण। संवाद
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रोड़ी। अध्यापकों के ऑनलाइन ट्रांसफर ड्राइव के चलते स्कूलों में हुए रिक्त पदों को लेकर गांव भीवां में ग्रामीणों ने सरकारी स्कूल के मुख्य गेट पर तालाबंदी करते हुए रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान विद्यार्थी भी कक्षाओं का बहिष्कार कर धरने में शामिल हुए। मौके पर किसी भी अधिकारी के न पहुंचने पर ग्रामीणों ने सरकार का पुतला फूंकते हुए नारेबाजी की।
ग्रामीण मजदूर यूनियन से वकील सिंह रोड़ी ने बताया कि गांव भीवां के हाई स्कूल में मात्र एक पंजाबी विषय का अध्यापक कार्यरत है। जबकि महत्वपूर्ण विषयों जैसे विज्ञान, गणित, अंग्रेजी व हिंदी के अध्यापकों के पद रिक्त हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा ट्रांसफर ड्राइव के नाम पर जिन अध्यापकों के तबादले किए जा रहे हैं, उनके स्थान पर कोई अध्यापक नियुक्त नहीं किए जा रहे। इसके चलते विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। सरकार की शिक्षा विरोधी नीति की वजह से उनके बच्चों का भविष्य दांव पर है। एक तरफ तो सरकार बेटी पढ़ाओ का नारा देकर ढिंढोरा पीट रही है, तो वहीं दूसरी तरफ बेटियों को ही शिक्षा से वंचित रखा जा रहा है। सरकार शिक्षा के ढांचे को खत्म करना चाहती है, क्योंकि अगर सभी वर्ग शिक्षित हो गया तो कहीं वे अपने हकों की आवाज न उठा दे। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में करीब 50 हजार अध्यापकों की जरूरत है। बिना पक्की भर्ती के स्कूलों में अध्यापकों की कमी को पूरा नहीं किया जा सकता। इसलिए सरकार शिक्षा विरोधी नीति को छोड़कर अध्यापकों की पक्की भर्ती करे व स्कूलों को मर्ज करना बंद करे। इस दौरान ग्रामीणों ने कहा कि सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों के रोषस्वरूप नौ सितंबर को तीन घंटे के लिए गांवों व कस्बों के रोड जाम की जाएंगी।