सिरसा। शहर में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से सखी वन स्टॉप सेंटर चलाया जा रहा है। इसमें घरेलू कलह होने पर महिलाओं द्वारा शिकायत दर्ज करवाई जा रही है। लेकिन महिलाओं द्वारा बड़ी ही अजीबो-गरीब शिकायतें दर्ज करवाई जा रही हैं। महिलाओं की अधिकतम शिकायतें घरेलू उत्पीड़न की हैं या फिर पति से किसी प्रकार की नाराजगी को लेकर। दो साल से चल रहे सेंटर में अब तक 408 शिकायतें दर्ज की गई हैं, जिसमें सबसे ज्यादा घरेलू हिंसा से संबंधित मिलीं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन घरेलू हिंसा के मामलों में से कुछ केस ऐसे हैं जिनकी जड़ को पहचाना जाए तो यह ही निकलकर आता है कि दोनों पक्षों में सहनशक्ति की कमी है। संवाद
केस-1 : डबवाली की 45 वर्षीय महिला ने वन स्टॉप सेंटर (सखी) में फोन करके अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। उसने बताया कि वह अपने पति के लिए सुबह 11 बजे खाना बनाकर तैयार रखती है, लेकिन पति खाना खाने घर नहीं आता। इस बारे में जब उसके पति को पक्ष जानने के लिए सेंटर पर बुलाया तो उसने कहा कि मुझे और भी बहुत काम होते हैं। पत्नी फॉयल पेपर में खाना बनाकर रख देती है। मुझे सिर्फ रोटी खाना ही काम रह गया क्या, इस मामले में वन स्टॉप सेंटर ने समझौता करवा दिया।
केस-2 : विभाग की ओर से कराई गई काउंसिलिंग में एक महिला ने कहा कि मैं अपने पति के लिए बड़े प्यार से गर्म खाना बनाती हूूं, लेकिन पति घर आकर गर्म खाना नहीं खाता। उसे ठंडा खाना पसंद है। लेकिन उन भावनाओं का क्या जो मैं इतने प्यार से उनके लिए खाना बनाती हूं। इतनी मेहनत करती हूं उसका क्या। पति का कहना है कि मुझे ठंडा खाना ही पसंद है। सेंटर के अधिकारियों की मदद से दोनों में समझौता हो गया है।
केस -3 : जिले के गांव सालमखेड़ा की महिला ने सर्दियों के समय में सेंटर में फोन किया और अपनी शिकायत दर्ज करवाई। महिला ने बताया कि वह घर के परिवारवालों के लिए बहुत प्यार से परांठे बना रही थी, लेकिन घर में कद्दू कश नहीं था। मेरा पति घर का सामान नहीं लाकर देता, घर में कद्दू कश ही नहीं है। मुझे घरवालों के लिए परांठे बनाने थे। बाद में काउंसिलिंग के दौरान महिला व पति को समझाकर मामले को सुलझाया गया।
केेेस-4 : एक मामला महिला थाने द्वारा सेंटर के पास आया जिसमें पंजाब की लड़की व लड़का के प्रेम विवाह के लिए लड़की की मां को समझाया गया। सेंटर के बताया कि इस मामले में लड़का, लड़की व लड़के के परिवार वाले शादी के लिए तैयार थे लेकिन लड़की की मां शादी से इनकार कर रही थी। सेंटर द्वारा पंजाब से लड़की की मां को बुलाया गया और समझाया गया। अभी मां को जवाब के लिए तीन महीने का समय दिया गया है।
जब ऐसे मामले हमारे सामने आते हैं तो एक बार तो समझ नहीं आता है कि इन मामलों पर क्या प्रतिक्रिया दें। लेकिन दोनों पक्षों को सेंटर पर बुलाकर काउंसिलिंग की जाती है। ऐसे मामलों में सबसे अधिक समय लगता है। ऐसे मामलों की गहराई में जाकर देखा जाए और इनकी जड़ को पहचाना जाए तो यह ही निकलकर आता है कि दोनों पक्षों में सहनशक्ति की कमी है। - मंजू चौधरी, आईटी विशेषज्ञ
दो साल में विभाग के पास लगभग 408 शिकायतें आईं, जिसमें से सबसे ज्यादा शिकायतें घरेलू हिंसा की है। इनमें से कुछ मामले ऐसे हैं जिनको सुलझाने में विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ी, क्योंकि ऐसे मामले लीगल मापदंड से बाहर होते हैं। भावनात्मक तरीकों से ही ऐसे मामलों को सुलझाया जाता है। - हरीश चंद्र, लीगल एडवाइजर