सिरसा। सनातन धर्म राधा-कृष्ण मंदिर वाली गली में दिव्य आध्यात्मिक हनुमत सत्संग समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस सत्संग के तीसरे दिन भिक्षु तपोवन (हरिद्वार) से पधारे कथावाचक डाॅ. स्वामी दिव्यानंद महाराज ने प्रवचन किया। डाॅ. दिव्यानंद ने बताया कि मनुष्य जीवन में रोजाना कई घटनाएं हो रहीं हैं, लेकिन हम अपने जीवन के प्रति सतर्क नहीं हैं।
उन्होंने बताया कि शरीर कपड़े जैसा है। जिस प्रकार आप शरीर से कपड़ा उतारकर दूसरा कपड़ा पहनते हो। फिर मैं गोरा, तुम काला कहते हो। तुम गोरे हो या तुम्हारा शरीर गोरा है लेकिन शरीर की परिभाषा को समझने तक भागवत का सार आपकी समझ में नहीं आएगा।
स्वामी जी ने कहा कि कुछ लोग हिंदू धर्म का झंडा लगाकर घूम रहे हैं लेकिन उन्हें हनुमान चालीसा का अर्थ तक पता नहीं। इसलिए बाहरी आडंबरों के बजाय अपने भीतर झांकें और परमात्मा का स्मरण करें। सत्संग में बैठने का फायदा तभी है, जब आप वहां मन लगाकर बैठें, न कि सिर्फ तन से।
स्वामी ने कहा कि सत्संग की बातों को जीवन में उतारे बिना सत्संग सुनने का कोई फायदा नहीं है। हनुमान जी ने जिस प्रकार जप और तप से साधना कर भक्ति व शक्ति का जो मार्ग प्रस्तुत किया, वह आज के समय में कोई नहीं कर सकता।
उन्होंने जिंदगी रूपी गाड़ी का उदाहरण देते हुए बताया कि जिस प्रकार गाड़ी में पेट्रोल डालते हैं तो हमें लगता है कि गाड़ी चल रही है, लेकिन मरता पेट्रोल कौन है, ठीक उसी प्रकार हमारे जीवन की गाड़ी है। स्वामी जी ने कहा कि कृष्ण जी ने कहा था कि गीता का उपदेश यही है कि धर्म को ग्लानि से बचाना, जिसका मतलब यह है कि आपके अंदर नकारात्मकता का भाव नहीं होना चाहिए।
इस मौके पर समाजसेवी मनोहर लाल मुक्तसर, पुनीत मुक्तसर, अशोक गंडा, रिषभ गाबा, पवन भंडारी, डाॅ. जीएस गुप्ता, एडवोकेट जेबीएल गर्ग, एडवोकेट विनोद गोयल, कमल गर्ग, सतपाल जिंदल आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।