डबवाली। श्रीराम कथा के दौरान प्रवचन देते हुए साध्वी। संवाद
डबवाली। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से श्री माता वैष्णो मंदिर में पांच दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है। मंगलवार को कथा के प्रथम दिवस का शुभारंभ विनोद सिंगला, अभय सिंगला और उनकी धर्मपत्नी तनु सिंगला, ध्रुव सिंगला ने पूजन करके किया। कथा के पहले दिन साध्वी त्रिपदा भारती ने कहा कि मानव जीवन आत्मा और परमात्मा के मिलन का एक दुर्लभ अवसर है।
मन्नशील प्राणी होते हुए भी एक इंसान अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाता। क्योंकि वह जीवन के इस रहस्य से अपरिचित है। यही हालात यही हालत हिमालय में हिमवान और मैना की थी। अपनी ही बेटी के रूप में साक्षात शक्ति व द्वार पर खड़े भगवान भोलेनाथ को वह पहचान नहीं पाए। जब उनको नारद जी ने आकर वास्तविकता का बोध करवाया तो वह सत्य से परिचित हो पाए।
मानव भी अपने भीतर बैठे परमात्मा को न जानने से दुखी व अशांत है। वह तब तक नहीं जान सकता है जब तक उसके जीवन में नारद रूपी गुरु का आगमन नहीं होता। यह सृष्टि का अटल नियम है ,जिसे भी परमात्मा रूपी रहस्य की पुष्टि हुई उसके जीवन में पहले पूर्ण गुरु का आगमन हुआ। समाज की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए साध्वी ने कहा कि समाज मानव मन की अभिव्यक्ति है।
यदि हमें एक स्वच्छ व सुंदर समाज का निर्माण करना है तो भारतीय संस्कृति जीवन दृष्टि को पुनर्जीवित करना होगा। उसे सक्रिय रूप से लागू करना होगा। इसी भारत भूमि के संतों ने हमें चेताया कि भूमि के सुख को भोगो तो सही लेकिन त्यागपूर्वक, यदि त्यागपूर्वक नहीं भोगोगे तो भोगने की क्षमता और सामर्थ्य नहीं रहेगा। संतों के बताए मार्ग पर चलना चाहिए।