संवाद न्यूज एजेंसी
रानियां। हौसला बुलंद हो तो कोई भी मुश्किल राह रोक नहीं सकती, इसका जीवंत उदाहरण हैं गांव बालासर की बेटी चांदनी सेन। उनके जीवन में संघर्ष और चुनौतियां हमेशा रही हैं। पिता पप्पू राम शारीरिक रूप से विकलांग हैं और कृषि कार्य करते हैं। माता पम्मी देवी गृहिणी हैं।
इसके बावजूद चांदनी सेन ने हॉकी में राष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रदर्शन से नाम कमाया। वर्तमान में वह राजीव गांधी खेल स्टेडियम बालासर में सीनियर नेशनल टूर्नामेंट की तैयारी कर रही हैं। इसके साथ ही आसपास की लगभग 30 लड़कियों को हॉकी की ट्रेनिंग दे रही हैं।
चांदनी सेन की हॉकी यात्रा 2018 में शुरू हुई, जब उन्हें पास के गांव नाईवाला के कोच सुरेंद्र ने हॉकी के मैदान में उतारा। शुरुआती विरोध और पारिवारिक रुकावटों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से खंड, जिला और राज्यस्तर के टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया।
2022 में स्नातक प्रवेश के दौरान उन्होंने अमृतसर और कुरुक्षेत्र में हुए प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट खेल दिखाया। 2024 और 2025 में नेपाल में आयोजित नेशनल हॉकी चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।
आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद प्राप्त की सफलता : परिवार आर्थिक रूप से सक्षम न होने के बावजूद चांदनी ने ट्यूशन पढ़कर खर्च निकालते हुए तैयारी जारी रखी। बीए फाइनल परीक्षा के समय भी उन्होंने नेपाल में रजत पदक जीता।