गेहूं के सीजन में हर वर्ष मंडी के आसपास के क्षेत्र में जाम की स्थिति बनी रहती है। मंडी में जगह न होने के कारण किसानों को सड़कों पर ही गेहूं की ढेरियां लगानी पड़ती हैं। पूरी मंडी गेहूं से अट गई है। अब तक जिले में 68 लाख क्विंटल गेहूं की खरीद की जा चुकी है। हालांकि खरीद 15 मई तक चलेगी, लेकिन आवक का जोर 30 अप्रैल तक ही होने की संभावना है। एकदम से गेहूं की आवक होने के कारण मंडियों में ढेरियां लगाने की जगह नहीं बचती।
हर वर्ष 15 अप्रैल के बाद गेहूं की आवक तेज हो जाती है और 25 अप्रैल तक आवक जोरों पर रहती है। कारण है कि गेहूं की फसलें लगभग किसान कंबाइनों से निकालते हैं और 70 प्रतिशत से अधिक रकबे की कटाई 15 से 25 अप्रैल तक होती है। कंबाइन से गेहूं निकलने के कारण मंडियों में भी अत्यधिक पहुंच जाती है। इस कारण न केवल मंडी परिसर, बल्कि आसपास के क्षेत्र में भी गेहूं की ढेरियां लग जाती हैं।
मंडी के चारों ओर से फोर लेन रोड है, जो गेहूं के सीजन में एक साइड बंद हो जाती है। यही वजह है कि सीजन में मंडी के आसपास क्षेत्र में जाम की स्थिति बनी रहती है। इसके अलावा उठान में लगे वाहनों की भी भीड़ हो जाती है। इससे शहर के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। आसपास के दुकानदार भी हर वर्ष सीजन में परेशान हो जाते हैं।
अब तक 68 लाख 5 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार अब तक जिले में 68 लाख 5 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी है, जिसमें से चार लाख 33 हजार क्विंटल का ही उठान हो पाया है। आवक अधिक होने और उठान कम होने के कारण मंडियों में जाम की स्थिति बनी हुई है। हालांकि सीजन आरंभ होने से पूर्व प्रशासन और शासन द्वारा उठान के ठेकेदारों को निर्देश दिए गए थे कि उठान तेजी से करना है, लेकिन ठेकेदारों पर कोई असर नहीं हो रहा। इससे लोगों को परेशानी हो रही है।
मंडी परिसर पड़ने लगा छोटा
पुराने रिकॉर्ड की बात करें तो 1975 में दो से तीन लाख एमटी, 1980 में ढाई से साढे़ तीन लाख एमटी, 1985 में तीन से चार लाख एमटी, 1990 में छह लाख एमटी, 1995 में आठ लाख एमटी, 2000 में 10 लाख एमटी, 2008-09 में 14 लाख एमटी की आवक हुई थी। इस प्रकार गेहूं का उत्पादन बढ़ता गया और मंडियां छोटी पड़ती गई। जिस गति से उत्पादन बढ़ रहा है, उसी प्रकार गेहूं का सीजन भी कम दिनों का होता जा रहा है।
दूसरे हिस्सों में भी रहता है जाम
केवल अनाजमंडी के आसपास ही, नहीं बल्कि शहर के अन्य भागों में भी दिन भी जाम की स्थिति बनी रहती है। खासकर डबवाली रोड पर अस्पतालों के आगे। अस्पतालों के आगे चाय-जूस वालों की स्टॉल लगी रहती हैं, जिसके बाद डॉक्टर की गाड़ी और एंबुलेंस गाड़ियां खड़ी रहती हैं। इसकी अगली पंक्ति में तीमारदारों के वाहन खड़े होते हैं। ऐसे में आधी से अधिक सड़क पर वाहन खड़े रहते हैं, जिस कारण जाम की स्थिति बनी रहती है। इन अस्पतालों के खिलाफ नगर परिषद और यातायात पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती।
मंडी के लिए जमीन का भेजा जा चुका प्रस्ताव
सरकार ने जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए शहर से बाहर मंडी बनाने की प्रक्रिया शुरू की है। करीब सवा सौ एकड़ में बनने वाली मंडी के लिए जमीन का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। इस मंडी के निर्माण के बाद शहर में गेहूं के सीजन में जाम की समस्या नहीं रहेगी।
खरीद केंद्र बन रहे विकल्प
गेहूं खरीद के लिए विभाग द्वारा शहर से बाहर खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं, ताकि सीजन में शहर में जाम की स्थिति न बने। जिले में 51 खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां पर आसपास के गांवों से किसान गेहूं बेचने आते हैं। खरीद केंद्रों के कारण शहर में जाम की समस्या पर बहुत हद तक राहत मिलती है। खरीद केंद्र न होते तो पूरे शहर में जाम की स्थिति बन जाती। सभी खरीद एजेंसी को आदेश जारी किए हैं कि गेहूं के उठान में तेजी लाई जाए, लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
राजेश कुमार जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक