साल 2013-14 में मार्केट कमेटी डबवाली को करीब पचास लाख रुपये का झटका लगा है। इसके पीछे कारण हरियाणा के गेहूं का राजस्थान में जाना। साथ में नरमा की कम पैदावार को बताया जा रहा है। साल 2012-13 में मार्केट कमेटी की आमदन आठ करोड़ 28 लाख 77 हजार 598 रुपये थी। इस दौरान मार्केट कमेटी डबवाली ने सब्जी मंडी से 18 लाख 40 हजार 441 रुपये और अनाज मंडी से आठ करोड़ 10 लाख 37 हजार 157 रुपये कमाये थे।
सबसे गौर करने लायक तथ्य यह है कि इस वर्ष चौटाला सबयार्ड पर 2,95,009 क्विंटल गेहूं पहुंचा था। जबकि डबवाली मंडी में 22 लाख 15 हजार 825 क्विंटल गेहूं, चार लाख 73 हजार 700 क्विंटल नरमा सहित 107 क्विंटल कपास की बिकवाली हुई थी।
राजस्थान सरकार ने दिया था बोनस
साल 2013-14 मार्केट कमेटी डबवाली के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता। चूंकि इस वर्ष कमेटी की आमदन में काफी गिरावट दर्ज की गई है। एक अप्रैल 2013 से 31 मार्च 2014 तक के आंकड़े देखे तो पिछले वर्ष के मुकाबले मार्केट कमेटी को 48 लाख 82 हजार 013 रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
इस वर्ष मार्केट कमेटी की आमदन सात करोड़ 79 लाख 95 हजार 585 रुपये है, लेकिन इस वर्ष चौटाला सबयार्ड पर मात्र 110104 क्विंटल गेहूं बिकने के लिए आया था। इसी तरह डबवाली मंडी में 19 लाख 36 हजार 624 क्विंटल गेहूं, दो लाख 25 हजार 895 क्विंटल नरमा और 294 क्विंटल कपास बिकवाली के लिए पहुंची।
गहलोत सरकार के बोनस ने किया कबाड़ा
सबसे बड़ा झटका गेहूं में लगा। चूंकि हरियाणा में गेहूं का न्यूनतम भाव 1350 था। राजस्थान में तत्कालीन अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में विधानसभा चुनावों को देखते हुए गेहूं पर 150 रुपये बोनस दिया था। बोनस के कारण चौटाला सबयार्ड पर अपेक्षा से बहुत कम गेहूं पहुंचा।
राजस्थान से सटे हरियाणा के गेहूं उत्पादक गांवों के किसानों ने अपनी फसल को राजस्थान में बेचा। जिसका प्रभाव मार्केट कमेटी डबवाली की आमदनी पर पड़ा। साल 2012-13 में ग्वार के भाव में आई तेजी के कारण नरमा उत्पादकों ने ग्वार की बिजाई की। नरमा का क्षेत्रफल घटने तथा कम पैदावार के कारण नरमा कम पहुंचा।
साल 2013-14
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कुल मार्केट फीस 7,79,95,585 रुपये
साल 2012-13
कुल मार्केट फीस 8,28,77,598 रुपये
बोनस के कारण राजस्थान का रुख
बोनस के कारण गेहूं उत्पादकों ने राजस्थान का रुख किया। नियमानुसार किसान अपनी फसल को कहीं भी बेच सकता है। राजस्थान में किसान को गेहूं ले जाते समय रोका नहीं जा सकता था। इस वर्ष मार्केट कमेटी को कम आमदनी हुई है। पिछले वर्ष के मुकाबले मार्केट फीस करीब 50 लाख रुपये कम है।
-सुभाष अरोड़ा, सचिव, मार्केट कमेटी, डबवाली