किसानों के धरने में पहुंचे पवन बैनीपाल।
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हरियाणा बीज विकास निगम के पूर्व चेयरमैन एवं भाजपा नेता पवन बैनीवाल ने मंगलवार को भाजपा को अलविदा कह दिया। ऐलनाबाद विधान सभा से दो बार भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ चुके पवन बैनीवाल ने शहीद भगत सिंह स्टेडियम में किसानों के पक्का मोर्चा धरना स्थल से पार्टी छोड़ने की घोषणा की। इस मौके पर पवन बैनीवाल के साथ नौ गांवों के सरपंच, ब्लॉक समिति चेयरमैन व ब्लॉक समिति सदस्य मौजूद थे।
भाजपा छोड़ने के बाद पूर्व चेयरमैन पवन बैनीवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी के अंदर भी किसानों के लिए संघर्ष किया, लेकिन हमारी आवाज नहीं सुनी गई है। किसान और किसानी के लिए भाजपा छोड़ी है। किसानों के लिए प्रदेश अध्यक्ष से लेकर मुख्यमंत्री तक को लिखा गया। परंतु पार्टी की ओर से तीनों कृषि कानूनों को किसानों के हित में बताया गया। पार्टी ने कहा कि वे किसानों को इन कानूनों के बारे में बताए और किसानों को जागरूक करें।
बैनीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कृषि कानून उनकी ही समझ में नहीं आए। उन्हें इन कानूनों में किसानों का कोई हित दिखाई नहीं दिया। ऐसे में वे किसानों को क्या समझाते। वे किसान पुत्र है और किसानों से गद्दारी नहीं कर सकते। इसलिए भाजपा छोड़कर किसानों के साथ खड़े होना उन्हें बेहतर लगा। वैसे भी अन्नदाताओं से बढ़कर कोई दूसरा नहीं है।
राजनीतिक परिवार से हूं, चुनाव जरूर लड़ूंगा
बैनीवाल ने कहा कि इस मंच से राजनीति नहीं करना चाहता। किस पार्टी में जाउंगा, ये भविष्य की बात है। उन्होंने अभय चौटाला के इस्तीफे पर कहा कि किसानों की सहानुभूति बटोरने व कंडेला कांड के दाग धोने के लिए उन्होंने इस्तीफा दिया है। अगला चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे राजनीति परिवार से हैं, इसलिए चुनाव जरूर लड़ेंगे।
वहीं, प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा ने कहा कि संयुक्त मोर्चे से आह्वान किया था कि जो भी जजपा भाजपा को छोड़कर आएगा, उसका मान सम्मान करें। यह मोर्चा राजनीति का मंच नहीं है। अगर पवन बेनीवाल किसान मोर्चे के साथ है तो हम इनके साथ हैं। यह किसी अन्य पार्टी से टिकट पर लड़ते हैं तो मोर्चा इनके साथ नहीं होगा।
2014 में आए थे इनेलो छोड़कर
भाजपा में पवन बैनीवाल ने अपना राजनीति कैरियर इनेलो से शुरू किया था। वे चोपटा क्षेत्र से जिला पार्षद रह चुके हैं। कभी इनेलो में रहते हुए वे चौटाला परिवार के खासमखास थे। परंतु 2014 में चौटाला परिवार के साथ मनमुटाव होने के बाद वे पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए।
भाजपा ने 2014 के विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट देकर ऐलनाबाद में अभय सिंह चौटाला के मुकाबले खड़ा किया। यह चुनाव पवन बैनीवाल 11,539 वोट से हार गए। 2019 के विधानसभा चुनाव में भी पवन बैनीवाल को भाजपा ने दोबारा टिकट दी। दूसरा चुनाव भी पवन बैनीवाल 11 922 वोट से हार गए। दोनों चुनावों में कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही।
पवन बैनीवाल के भाजपा छोड़ने के बाद अब पार्टी के पास ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र में कोई कद्दावर नेता नहीं रह गया, क्योंकि वे पार्टी के लिए भीड़ जुटाने में माहिर थे। पार्टी में उनके कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विधानसभा चुनाव में 2014 में अमित शाह ने ऐलनाबाद में रैली की। इसी प्रकार से 2019 के विधानसभा चुनाव में ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र के अधीन आने वाले गांव मल्लेकां में पीएम नरेंद्र मोदी ने रैली की थी।
कांग्रेस या फिर निर्दलीय होगा विकल्प
पवन बैनीवाल न तो इनेलो में शामिल होंगे और न ही जजपा में। ऐसे में उनके पास कांग्रेस ही विकल्प है। किसानों के मंच से भाजपा छोड़कर वे किसानों का समर्थन हासिल कर चुके हैं। ऐलनाबाद उप चुनाव की घोषणा कभी भी हो सकती है और खुद पवन बैनीवाल भी कह चुके हैं कि वे चुनाव लड़ेंगे, ऐसे में पवन बैनीवाल निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी चुनाव लड़ सकते हैं।