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Sirsa News: दिव्यांगता भूल नीलम बनीं स्वावलंबन की ''नीलम''

Tue, 03 Feb 2026 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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सिरसा।नीलम अपने द्वारा बनाए हुए प्रोडक्टस दिखाते हुए। स्वयं
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आयुर्वेदिक हेयर उत्पाद से बना रहीं अलग पहचान, प्रदर्शनी व अन्य स्थानों पर बेचती हैं सामान
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फोटो-
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। बेगू रोड क्षेत्र की निवासी दिव्यांग महिला नीलम आत्मनिर्भरता और संघर्ष की मिसाल बनकर उभर रही हैं। बचपन से पोलियो से पीड़ित नीलम ने कभी भी अपनी दिव्यांगता को अपने आत्मविश्वास पर हावी नहीं होने दिया। नकारात्मक को छोड़कर उन्होंने अपने हुनर और मेहनत के बल पर स्वावलंबन की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है।
नीलम घर पर ही 100 प्रतिशत हर्बल ब्यूटी और हेयर केयर प्रोडक्ट्स तैयार कर रही हैं। उनके द्वारा बनाए गए ये उत्पाद जय हर्बल्स नाम से पहचाने जाते हैं। बीते 9 महीनों से वह इस कार्य में सक्रिय हैं। शुरुआत में उन्होंने अपने उत्पादों को परिवार और जान-पहचान वालों पर प्रयोग किया। अच्छे और सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद पिछले 6 महीनों से वह इन्हें व्यावसायिक रूप से बेच रही हैं।
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नीलम के तैयार किए जा रहे सभी उत्पाद पूरी तरह से आयुर्वेदिक और केमिकल-फ्री हैं। वह बालों से जुड़ीं विभिन्न समस्याओं जैसे बालों का झड़ना, समय से पहले सफेद होना, बालों में जूं पड़ना, बालों का कमजोर होना और बालों का लंबा न होना आदि के लिए अलग-अलग प्रकार के हर्बल ऑयल और हेयर टोनर तैयार करती हैं। उनका कहना है कि आज लगभग हर महिला किसी न किसी हेयर प्रॉब्लम से जूझ रही है, ऐसे में आयुर्वेदिक समाधान सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है।
कनाडा घूमने गईं, वहां से मिली प्ररेणा
नीलम ने हेयर केयर के क्षेत्र में खुद को मजबूत बनाने के लिए वीएलसीसी कंपनी से डेढ़ साल का एडवांस कोर्स भी किया है। उनका विशेष रुझान हेयर केयर की ओर रहा है। वह बताती हैं कि एक बार वह कनाडा घूमने गई थीं, जहां उन्होंने देखा कि वहां भी हेयर फॉल की समस्या बहुत अधिक है। यही समस्या भारत में भी तेजी से बढ़ रही है, यहां तक कि बच्चों में भी बाल झड़ने की शिकायत आम हो गई है। इसी अनुभव ने उन्हें इस क्षेत्र में गंभीरता से काम करने के लिए प्रेरित किया।
नीलम बचपन से ही पोलियोग्रस्त

46 वर्षीय नीलम बताती हैं कि वह बचपन से ही पोलियो से पीड़ित हैं। अच्छे से चल नहीं पाती हैं। समाज में कई बार लोगों ने उन्हें यह कहकर हतोत्साहित करने की कोशिश की कि वह कुछ नहीं कर सकतीं। लेकिन इन्हीं बातों ने उनके मन में कुछ कर दिखाने और अपने नाम से पहचान बनाने की जिद पैदा की। उन्होंने तय किया कि वे अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बनाएंगी।
मात्र 9 महीने में पंजाब तक जाने लगे हैं उत्पाद
आयुर्वेद के प्रति उनका झुकाव पारिवारिक पृष्ठभूमि से भी जुड़ा है। नीलम की बुआ आयुर्वेद के क्षेत्र में कार्य करती हैं, जिनसे उन्होंने जड़ी-बूटियों और आयुर्वेदिक उपचारों की बारीक जानकारी हासिल की। इसी ज्ञान को आधुनिक जरूरतों के अनुसार ढालकर उन्होंने अपने उत्पाद तैयार किए। आज नीलम के बनाए हर्बल प्रोडक्ट्स की मांग केवल उनके क्षेत्र तक सीमित नहीं है। चंडीगढ़, बठिंडा और लुधियाना सहित कई शहरों में उनका सामान भेजा जा रहा है। खास बात यह है कि जो भी व्यक्ति उनके उत्पादों का उपयोग करता है, वह अच्छे परिणाम देखकर आगे दूसरों को भी इसकी जानकारी देता है। इस तरह ‘मुंह से प्रचार’ के जरिए उनका काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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पति हैं सरकारी शिक्षक
नीलम महिलाओं को हेयर और ब्यूटी से जुड़ीं सेवाएं व प्रशिक्षण भी देती हैं। इससे न केवल उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता मिली है, बल्कि वह अन्य महिलाओं को भी आत्मविश्वास से भर रही हैं। परिवार की बात करें तो नीलम के पति सरदूलगढ़ में सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। उनकी एक बेटी पढ़ाई कर रही है, जबकि बेटा भी शिक्षा प्राप्त कर रहा है। परिवार का पूरा सहयोग मिलने से नीलम अपने कार्य को और विस्तार देने की योजना बना रही हैं।
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