बढ़ती सर्दी के बीच नागरिक अस्पताल में भी मरीजों की संख्या बढ़ रही है। वहीं अस्पताल की खिड़कियां टूटी होने के कारण मरीज सर्दी से परेशान हैं।
खिड़कियां में चादर और पर्दे डालकर किसी तरह सर्दी से अपनी बचाव कर रहे हैं। इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कुछ खिड़कियां पर लगे शीशे टूट चुके हैं जिसे जल्द बदलवाया जाएगा।
सुबह और रात में ठंडक बढ़ने से छोटे बच्चे और बुजुर्ग मौसमी रोगों के शिकार हो रहे हैं। पिछले कई दिनों से नागरिक अस्पताल व निजी अस्पतालों में सर्दी, खांसी, बुखार, माथा दर्द, जोड़ में दर्द, त्वचा रोग, थाइराइड से ग्रस्त मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई हैं।
नागरिक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लगी अधिक्तर खिड़कियां टूटी पड़ी है। जिससे वहां उपचाराधीन रोगी को सर्दी से बचने के लिए ज्यादा जुगत करने पड़ती है।
सुबह और रात को सर्द हवा खुली खिड़की से होकर वार्ड में आती है। मरीजों की इस समस्या पर अस्पताल प्रशासन का ध्यान नहीं जा रहा।
इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कुछ खिड़कियां पर लगे शीशे टूट चुके हैं जिसे जल्द बदलवाया जाएगा।
रोगियों को किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़े इसका ख्याल अस्पताल प्रशासन लगातार रखता है।
सर्दी के शिकार हो रहे बच्चे बूढ़े और जवान
जिलेभर के अस्पतालों में रोजाना करीब 100 रोगी उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार जैसे-जैसे ठंड बढ़ेगी रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जाएगी।
सरकारी अस्पताल में ठंड से जुड़े रोगों से ग्रस्त लोगों के उपचार हेतु मेडिकल वार्ड में सारी सुविधा की गई है। सर्दी से ज्यादातर छोटे बच्चे बीमार पड़ रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे समय में थोड़ी सी सावधानी बीमार होने से बचा सकती है। डॉक्टर जीएस सोमानी का कहना है कि ठंडे मौसम में शरीर की गर्मी मेनटेन करने के लिए ऊर्जा की ज्यादा जरूरत पड़ती है।
ऐसे समय में शरीर में विटामिन सी और बी-कॉंप्लेक्स का स्तर भी काफी कम हो जाता है, जिस कारण सर्दी, खांसी, बुखार, माथा दर्द आदि की समस्या तेजी से बढ़ती है।
डॉक्टर सुभाषिणी का कहना है कि ऐसी स्थिति से शरीर में इंयून सिस्टम बढ़ाने के लिए लोगों को कागजी नींबू, संतरा, मौसमी, आंवला और ऐसे फल जिसमें खट्टापन ज्यादा होता है, उसका ज्यादा से ज्यादा सेवन करना चाहिए।
इसके अलावा आवास पर साफ- सफाई का विशेष घ्यान रखें। लोगों को अब एसी का प्रयोग बंद करना चाहिए। ठंडे मौसम में पहनावा पर विशेष ध्यान दें और ज्यादा से ज्यादा शरीर ढका रहे ऐसे वस्त्र पहने।
दिनचर्या बदलें बुजुर्ग
इस मौसम में बुजुर्ग रोगी को विशेष रूप से संयमित रहने की जरूरत है। थोड़ी सी लापरवाही परेशानी में डाल सकती है। खासकर हृदय रोग, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, दमा व श्वास, स्किन डिसीज से पीड़त रोगियों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
अभी के मौसम में मार्निंग वॉक धूप निकलने के बाद ही करना चाहिए। बुजुर्ग को अल सुबह मार्निंग वॉक पर नहीं जाना चाहिए। बुजुर्ग अपनी दिनचर्या में सुधार लाकर और डॉक्टर से समय-समय पर अपना हेल्थ चेकअप कराकर सर्द मौसम में बीमारी से बच सकते हैं।
नागरिक अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर सुभाषिणी ने बताया कि ठंड बढ़ने से भले ही इन्फेक्शन से जुड़ी बीमारी का खतरा बढ़ जाता हो, लेकिन डेंगू जैसी खतरनाक बीमारी से लोगों को राहत मिल जाती है।
ठंड में डेंगू मच्छर कर प्रजनन रुक जाता है। यही कारण है कि ठंड के बढने के साथ ही डेंगू का प्रकोप घटता जाता है।