केंद्र सरकार के आम बजट में हरियाणा को बागवानी विश्वविद्यालय का तोहफा मिलने से क्षेत्र के किसानों के चेहरे खिल गए हैं। यहां के किसान काफी संख्या में बागवानी की ओर मुड़ रहे हैं। ऐसे में यदि प्रदेश में बागवानी विश्वविद्यालय बनेगा तो निश्चित रूप से यहां के किसानों को फायदा मिलेगा। प्रदेश में बीएससी और एमएससी हॉर्टिकल्चर का रुझान भी विद्यार्थियों में बढ़ेगा। प्रदेश में बागवानी करने वाले किसानों के लिए भी खुशखबरी की बात है। बागों की बीमारियों पर विशेष रूप से रिसर्च होगी।
जिला बागवानी अधिकारी सुरजीत सिंह माचरा ने बताया कि प्रदेश में बागवानी का विश्वविद्यालय बनने से बागवानी की खेती को बढ़ावा मिलेगा। किसानों को भी बागवानी की कृषि करने में आसानी होगी। रिसर्च कार्यक्रमों में इजाफा होगा। नए वैज्ञानिक तैयार होंगे। बीमारियों पर रोकथाम के संसाधनों में भी बढ़ोतरी होगी। उन्होंने बताया कि बागवानी विभाग को भी इस यूनिवर्सिटी का लाभ होगा।
नई किस्में तैयार होंगी तो उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी। हमारा प्रदेश अन्य राज्यों से फ्रूट मंगवाने की बजाए वहां पर फ्रूट भेजने लगेगा। फलों का जितना उत्पादन ज्यादा होगा किसानों को आर्थिक लाभ तो होगा ही साथ में लोगाें को स्वास्थ्य लाभ भी मिलेगा। डीएचओ ने बताया कि हालांकि जिले में बागवानी की कृषि काफी कम है, लेकिन अब किसानाें का रुझान बागवानी की कृषि की ओर बढ़ने लगा है। यूनिवर्सिटी बनने का काफी लाभ मिलेगा। उन्हाेंने कहा कि सिरसा इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है, जहां पर बागवानी ही बागवानी है।
जिले में बागवानी की कृषि का रकबा
आम- 12 हेक्टेयर
अमरूद- 210 हेक्टेयर
किन्नू व अन्य निंबू प्रजातियां- 8495 हेक्टेयर
बेर- 28 हेक्टेयर
आंवला- 3 हेक्टेयर
अंगूर- 4 हेक्टेयर
कुल- 8754 हेक्टेयर