चोपटा क्षेत्र में वर्ष 2013 से लेकर अगले कुछ सालों तक किसानों को फर्जी पर्चियों के सहारे नलकूप कनेक्शन देने वाले बिजली निगम के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे किसानों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। मामले में कोई सुनवाई न होने पर सात किसानों ने सिर मुंडवाए। साथ ही शनिवार को काला दिवस मनाते हुए मुख्यमंत्री का पुतला फूंकने तथा अगले शुक्रवार को नग्नावस्था में प्रदर्शन करने का ऐलान किया।
गौरतलब हो कि वीरवार को अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन करने वाले किसानों ने शुक्रवार को सरकार की उदासीनता के खिलाफ सात किसानों ने अपने सिर का मुंडन करवाकर विरोध जताया। इस दौरान किसानों ने हरियाणा सरकार मुर्दाबाद, बिजली निगम मुर्दाबाद, जिला प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाकर अपना रोष व्यक्त किया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान किसान नेता विकल पचार, प्रकाश सिहाग आदि ने बताया कि वर्ष 2013 से लेकर अगले कुछ सालों तक बिजली निगम के अधिकारियों ने फर्जी पर्चियों के आधार पर उनसे ढाई-ढाई लाख रुपये की राशि लेकर उन्हें कनेक्शन दिए गए। अब निगम के अधिकारी ही अपने निगम के भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल कसने की बजाए किसानों को ही उपकरणों को चोरी करने का दोषी बता रहे हैं। किसानों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि इस सारे प्रकरण में अकेले चोपटा क्षेत्र से करीब 44 करोड़ रुपये, सिरसा में 99 करोड़ और समूचे प्रदेश में फर्जी तर्ज पर दिए गए कनेक्शनों के आधार पर करीब एक हजार करोड़ रुपये का घोटाला है जिसमें दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के उच्च अधिकारी भी संलिप्त हैं।
इन किसानों ने मांग की कि इस सारे मामले की जांच चार सदस्यीय कमेटी के माध्यम से होनी चाहिए जिसमें एक आईएएस अधिकारी, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश और दो किसान प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए। आक्रोशित किसानों ने बताया कि जिन बिजली निगम के अधिकारियों ने इस मामले में फर्जी पर्चियों के सहारे उन्हें बिजली कनेक्शन दिए गए, वे अधिकारी ही उन पर्चियों से संबंधित वास्तविक बुक के गुम होने का बहाना लेकर समूचा दोष किसानों पर ही मढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। किसान नेताओं ने बताया कि अब तक इस बड़े घोटाले का जब तक पूरी तरह से पर्दाफाश नहीं होता और दोषी बिजली निगम के अधिकारियों को दंडित नहीं किया जाता, तब तक किसानों का संघर्ष जारी रहेगा। किसान नेता बिकल पचार ने कहा कि अब तक किसी भी भारतीय आंदोलन के इतिहास में ऐसा उदाहरण नहीं है जिससे सामाजिक लज्जा स्तर से नीचे आ जाए, मगर सरकारी और प्रशासनिक उदासीनता के चलते अब किसानों ने निर्णय लिया है कि आगामी शुक्रवार को सभी प्रदर्शनकारी किसान रोषस्वरूप पूर्ण नग्नावस्था में प्रदर्शन करेंगे जिसका जिम्मेदार प्रशासनिक तंत्र होगा जिसने अब तक इस मामले में दोषी निगम अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करने की जहमत तक नहीं उठाई। पचार ने बताया कि इस प्रदर्शन में अभी तक किसानों को अखिल भारतीय स्वामीनाथन संघर्ष समिति, किसान यूनियन, किसान सभा, हरियाणा किसान मंच, भारतीय किसान संगठन व सर्वकर्मचारी संघ आदि संगठनों का समर्थन हासिल हुआ है।
अधिकारियों को बचाने में लगा निगम
किसान नेताओं ने कहा कि गर्मी में जब किसानों के लिए खेतों में नरमा और ग्वार की बिजाई का मौसम है, वे यहां न्याय मांगने के लिए धरने पर मजबूर हैं। पर प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से इस मामले में दोषी निगम अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों ने कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो इस आंदोलन की चिंगारी पूरे हरियाणा में फैलेगी। वहीं मामले में किसानों की बात सुनने के लिए बिजली निगम के एक्सईएन एमएल सुखीजा भी मौके पर पहुंचे और निगम की ओर से कमेटी का गठन कर जांच करने की बात कहते हुए किसानों से शांतिपूर्वक तरीके से धरना समाप्त करने का आग्रह किया। मगर किसानों ने बिजली निगम अधिकारियों की बजाए पूर्व न्यायाधीश पर आधारित कमेटी द्वारा ही मामले की जांच कराने पर बल देते हुए धरना समाप्त करने से इनकार कर दिया।