जिले के गांव छतरियां में मृतकों के नाम से हजारों रुपये पेंशन निकालने मामले में तत्कालीन सरपंच के खिलाफ सीएम विंडो में शिकायत दी गई है। मृत लोगों के नाम से हड़पी पेंशन राशि सरकारी खजाने में वापस जमा करवाने और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई मांग मुख्यमंत्री से की गई है। व्हीस्ल ब्लोअर भजनलाल ने सीएम विंडो पर पूरे मामले की पड़ताल करने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने बताया कि आरटीआई में हासिल दस्तावेज से गांव छतरियां के तत्कालीन सरपंच का पेंशन गड़बड़ी का मामला सामने आया था। गांव के छह मृतकों के फर्जी अंगूठे लगाकर पेंशन निकाली गई थी। लंबी जांच-पड़ताल में शिकायत सही पाई। सरपंच को डकारी गई राशि खजाने में जमा भी करवानी पड़ी, लेकिन उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। तत्कालीन डीसी ने आरोपी सरपंच को महज चेतावनी देकर छोड़ दिया। इसलिए मामले की पुन: जांच की जाए और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
अब फिर व्हीस्ल ब्लोअर भजनलाल ने सीएम विंडो पर भेजी शिकायत में पूर्व में की गई कार्रवाई पर भी प्रश्नचिह्न लगाया है। कहा गया है कि आरोपी सरपंच को नोटिस देकर आरोप सिद्ध होने के बावजूद चेतावनी देकर छोड़ दिया।
एसडीएम ने की थी जांच
गांव छतरियां में मृत लोगों के नाम से पेंशन डकारने मामले की जांच सिरसा के तत्कालीन एसडीएम ने की। उन्होंने पंचायत विभाग, समाज कल्याण विभाग, शिकायतकर्ताओं के साथ आरोपी के भी बयान दर्ज किए। अपनी जांच रिपोर्ट में एसडीएम ने तत्कालीन सरपंच की दलीलों को खारिज करते हुए उन पर लगाए गए आरोपों को सत्य बताया। सरपंच ने मृत व्यक्तियों की पेंशन फर्जी अंगूठे लगाकर वितरित की और अपने पद का दुरुपयोग किया।
इन लोगों के नाम से डकारी पेंशन
छतरियां निवासी जसिया देवी पत्नी ओमप्रकाश के नाम जनवरी-2011 तक पेंशन निकाली गई, जबकि जसिया देवी का निधन 25 जून 2010 को हो गया था। इसी प्रकार रणजीत पुत्र बुधराम को जनवरी-2011 तक पेंशन देना दर्शाया गया, जबकि उसकी मौत 15 अगस्त 2010 को हो गई थी।
बोगा देवी पत्नी पतराम को जनवरी 2011 तक विकलांग पेंशन देना दर्शाया, जबकि उसकी मौत भी 25 नवंबर 2010 को हो गई थी। चमेली देवी पत्नी कांशीराम की मौत 23 दिसंबर 2010 को हुई और उसे जनवरी-2011 तक पेंशन देना दर्शाया। मनफूल पुत्र भीयाराम की मौत 5 जनवरी 2011 को हो गई। उसे भी मौत के उपरांत पेंशन देना दर्शाया गया।