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Sirsa News: डॉक्टर की लापरवाही से विकलांग हुआ वन विभाग का दरोगा, देना होगा 5 लाख मुआवजा

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सिरसा। डॉक्टर की लापरवाही के चलते वन विभाग का दरोगा 50 प्रतिशत विकलांग हो गया। जिला उपभोक्ता निवारण आयोग सिरसा ने आरोपी डॉ. वाई के. चौधरी व न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग अध्यक्ष पीएस ठाकुर ने कहा है कि 45 दिनों की अवधि के भीतर पीड़ित को राशि न दी गई तो 6 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से ब्याज सहित मुआवजा राशि देनी होगी।
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इसके अलावा शिकायतकर्ता को उत्पीड़न के लिए 20 हजार रुपये का मुआवजा और 10 हजार रुपये का मुकदमा खर्च देना होगा। मामले के अनुसार, देवीलाल मॉडल टाउन सिरसा निवासी भीम सिंह वन विभाग में दरोगा के पद पर कार्यरत हैं। 20 जून 2020 को भीम सिंह की बाईं कोहनी में फ्रैक्चर हो गया। वह उपचार के लिए चौधरी आर्थोपेडिक एवं जनरल अस्पताल के डॉ. वाई के. चौधरी के पास गया।
डॉ. वाई के. चौधरी ने उसे ऑपरेशन कराने की सलाह दी। 22 जून 2021 को भीम सिंह का डॉ. वाई के. चौधरी ने ऑपरेशन कर दिया। इसके बाद भी भीम सिंह की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। डॉक्टर ने उसे आश्वासन दिया कि वह जल्द ठीक हो जाएगा। 25 जून 2021 को डॉ. वाई के. चौधरी ने उसे छुट्टी दे दी और एक सप्ताह बाद आने को कहा।
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एक सप्ताह बाद भी भीम सिंह की कोहनी का दर्द ठीक नहीं हुआ। इसके बाद वह फिर से डॉक्टर से मिला तो उसे फिजियोथेरेपी कराने की सलाह दी। भीम सिंह ने कई महीनों तक यह उपचार कराया, लेकिन सुधार नहीं हुआ। संवाद


दूसरे डॉक्टर ने बताया, ऑपरेशन सही ढंग से नहीं हुआ
इसके बाद भीम सिंह की हालत दिन-प्रतिदिन बिगड़ती गई और उसकी कोहनी हिलना बंद हो गई। जब उन्होंने अपनी बाजू में कोई सुधार नहीं दिखा तो कई अन्य डॉक्टरों से परामर्श लिया और अंत में केयर अस्पताल सिरसा के डॉ. अंकुश मेहता से मिले। यहां उसे बताया गया कि उनका ऑपरेशन सही ढंग से नहीं हुआ है। इसके बाद वह फिर से डॉ. वाई के. चौधरी से मिले और बताया कि हाथ सही ढंग से नहीं हिलता है, जिससे उसकी दिनचर्या और उसकी फील्ड वर्क की सेवा भी प्रभावित हो रही है। डॉक्टर ने उनसे कहा कि वह अब कुछ नहीं कर सकता।


आयोग ने कहा-मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट की जरूरत नहीं
11 अक्तूबर 2021 को भीम सिंह ने जिला उपभोक्ता निवारण आयोग सिरसा में डॉ. वाई के. चौधरी व न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, ब्रांच मैनेजर सिरसा के खिलाफ शिकायत दायर कर न्याय की गुहार लगाई। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि डॉक्टर की ओर से दी गई सलाह डॉ. वाई के. चौधरी की ओर से चिकित्सकीय लापरवाही को दर्शाती है। हालांकि, चिकित्सकीय लापरवाही के संबंध में शिकायतकर्ता की ओर से सरकारी अस्पताल के मेडिकल बोर्ड की कोई विशेषज्ञ रिपोर्ट फाइल पर नहीं रखी गई है, लेकिन हमारी राय में इस मामले में मेडिकल बोर्ड की कोई विशेषज्ञ रिपोर्ट की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि केयर अस्पताल सिरसा के डॉ. अंकुश मेहता भी एक योग्य सर्जन और ऑर्थोपेडिक डॉक्टर हैं।




डॉक्टर व बीमा कंपनी संयुक्त रूप से करे भुगतान
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि शिकायतकर्ता की कलाई की हरकत के लिए फिर से सर्जरी की आवश्यकता है। इसका अर्थ है कि शिकायतकर्ता की कलाई काम करने की स्थिति में नहीं है और शिकायतकर्ता 50 प्रतिशत विकलांग हो गया है। इसलिए शिकायतकर्ता पांच लाख रुपये के मुआवजे का हकदार है। बीमा पॉलिसी दस्तावेज से यह साबित होता है कि शिकायतकर्ता का 16 सितंबर 2019 से 15 सितंबर 2020 की अवधि के लिए 20 लाख रुपये की राशि के लिए बीमा किया गया था। बीमा अवधि डॉ. वाई के. चौधरी की ओर से किए गए ऑपरेशन की तारीख को भी कवर करती है। इसलिए दोनों संयुक्त रूप से शिकायतकर्ता को पांच लाख रुपये का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी हैं।
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