सिरसा। शुक्रवार सुबह घनी धुंध छाने से वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई। बसों को अपने गंतव्य स्थानों तक पहुंचने में एक से दो घंटे की देरी हुई। वहीं किसानों के चेहरों पर रौनक देखी गई। किसान ऐसे मौसम का इंतजार कर रहे थे। धुंध के कारण पारा भी दो डिग्री कम हो कर 22 डिग्री तक आ पहुंचा।
शुक्रवार को सुबह-सवेरे से ही धुंध छा गई थी। दिन के 11 बजे तक गहरी धुंध रही जिससे वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया। बसें अपने निर्धारित समय से देरी से गंतव्य स्थानों पर पहुंचीं। सुबह नौ बजे तक तो दृश्यता10 मीटर से भी कम रही। इसके बाद धुंध कुछ कम हुई। शहर में 11 बजे तक धुंध छंट गई थी जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 12 के बाद तक भी धुंध थी। धुंध के कारण गेहूं व अन्य फसलों के पत्तों से पानी टपकने लगा। किसानों का कहना है कि फसलों के यह मौसम घी का काम करेगा। ऐसा मौसम न हो तो उत्पादन कम होता है। इस के अलावा गर्मी के कारण कई प्रकार की बीमारियां फसलों में आ जाती हैं जिससे भी उत्पादन प्रभावित होता है।
किसान सुभाष कुमार ने बताया कि इस बार पूरे दिसंबर माह बिना धुंध के निकल गया ऐसे में चिंता हो रही थी कि यदि अब धुंध नहीं पड़ी तो फसलें खराब हो जाएंगी। धुंध से गेहूं, सरसों व चने की फसलों को लाभ मिलता है। मौसम साफ होने से तेज धूप निकलती है जिससे तापमान बढ़ जाता है और इन फसलों के लिए अधिक तापमान नुकसानकारी साबित हो सकता है। कृषि उप निदेशक बाबू लाल ने बताया कि इस प्रकार का मौसम फसलों के लिए बहुत लाभकारी होता है। धुंध से तापमान नियंत्रण में रहता है और फसलें अधिक फुटाव करती हैं जिससे उत्पादन बढ़ता है। कई प्रकार की बीमारियों से भी फसलों को छुटकारा मिलता है।
उन्होंने बताया कि मार्च तक जितनी ठंड पड़ेगा फसलों का उतना ही लाभ मिलेगा। ऐसे में यदि बरसात हो जाए तो सोने पे सुहागा होगा। उल्लेखनीय है कि अब तक धुंध न आने से किसान काफी चिंतित थे। पूरे दिसबंर के बाद जनवरी का भी एक सप्ताह साफ मौसम में बीत गया था। ऐसे में किसानों की चिंता बढना स्वाभाविक है।
उधर स्कूली बच्चों को चिंता भी होने लगी हैं क्योंकि उनकी अधिकतर छुट्टियां तो साफ मौसम में ही बीच गई। अब सोमवार को स्कूल खुलेंगे और आज धुंध देखकर विद्यार्थियों की चिंता बढ़ गई। अब उन्हें ऐसे मौसम में स्कूल जाना पड़ेगा। खासकर गांवों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। ठंड बढते ही मूूंगफली का बाजार भी गर्म हो गया।