सिरसा। बकाया मुआवजे व किसानों की अन्य मांगों को लेकर लघु सचिवालय में बीकेई के बैनर किसानों का पक्का मोर्चा 41वें दिन भी अनवरत जारी है। स्वतंत्रता सेनानी परिवार से आमरण-अनशन पर बैठे डिंग मंडी निवासी ओमप्रकाश झुरिया का पांच किलोग्राम वजन कम होने के साथ-साथ बीपी व शुगर लेवल भी घट गया है।
बीकेई अध्यक्ष लखविंद्र सिंह औलख ने कहा कि किसानों की प्रशासन के साथ कई दौर की वार्ता हो चुकी है। अभी तक प्रशासन का रवैया समाधान के बजाय धरना पर उठाने पर अधिक है। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो सरकार स्वतंत्रता सेनानियों को सुविधाएं देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर आमरण-अनशन पर बैठे 68 वर्षीय ओमप्रकाश झुरिया का तीन दिनों से हाल जानने भी नहीं पहुंचे, जोकि सरकार की मंशा को साफ दर्शा रहा है। औलख ने कहा कि बीते दिवस सांसद सुनीता दुग्गल बैठक में डीसी कार्यालय आई थीं, लेकिन किसानों से बिना बात किए ही निकलने की होड़ में थी। किसानों ने नारेबाजी की तो वह किसानों के बीच पहुंच गई। सांसद ने किसानों के सवालों के जवाब देने के बजाय सरकार की उपलब्धियां गिनवानी शुरू कर दीं। इसपर किसानों ने कहा कि उन्हें सरकार की उपलब्धियां नहीं, बल्कि बकाया मुआवजा राशि चाहिए। सांसद ने कोई जवाब नहीं दिया और वहां से चली गईं। किसानाें ने प्रशासन व सरकार को चेताया कि अगर आमरण-अनशन पर बैठे ओमप्रकाश के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसके लिए प्रशासन व सरकार जिम्मेदार होंगे। उन्होंने बताया कि 27 फरवरी को लघु सचिवालय में राज्य सरकार का पुतला दहन किया जाएगा।