तैंतीस साल पहले करीब 65 एकड़ जमीन 26 भूमिहीन किसानों को अलॉट हुई थी। आठ बार केस जीतने के बावजूद कब्जा आज तक नहीं मिला। आठ लोग जमीन का सपना देखते-देखते परलोक सिधार गए। उनकी तीसरी पीढ़ी अदालतों के चक्कर काट रही है। पिछले बारह सालों से केस हाईकोर्ट में लंबित है। एक बार भी तारीख पर नहीं बुलाया गया। सरकार ने भी केस का स्टेटस नहीं बताया तो भूमिहीनों ने अपने खर्चे पर प्राईवेट वकील खड़ा कर दिया है। सुनवाई के लिए तारीख 17 मार्च 2016 लगाई गई है।
यह मामला खंड डबवाली के गांव अहमदपुर दारेवाला का है। द सिलिंग हरियाणा लैंड एक्ट 1972 के तहत सरकार ने वर्ष 1982 में 26 भूमिहीन उदेराम रोलण, ओमप्रकाश रोलण, परसराम शर्मा, आत्माराम वाल्मीकि, वजीर सिंह पन्नू, मलसिंह पन्नू, मुख्तियार सिंह पन्नू, गंगाजल, रविशंकर शर्मा, गुगनराम, इंद्राज जोगपाल, गंगाराम, कृष्ण वाल्मीकि, अमर सिंह नायक, आदराम नोखवाल, तेजा राम, दीपाराम, पतराम, छोगाराम बिरट, इंद्र सिंह, चिरागराम, ज्ञानराम, दीपाराम जोगपाल, ठकर राम सहरावता, बृजलाल डुडी को भूमि अलॉट की थी। भूमि मालिक ने इसके खिलाफ विभिन्न अदालतों में केस दायर किया। 18 नवंबर 1982 को उपमंडल अधिकारी डबवाली, 17 मई 1985 को कलेक्टर सिरसा, इसके बाद कमीशनर हिसार, 1987 में एफसीआर, चंडीगढ़, 15 सितंबर 1993 को कलेक्टर सिरसा, दोबारा फिर 29 जून 1995 को उपमंडल अधिकारी डबवाली, 12 मार्च 1997 को कलेक्टर सिरसा की अदालत ने सुनवाई करते हुए भूमिहीनों के पक्ष में फैसला सुनाया। यही नहीं सिविल कोर्ट सिरसा में भी फैसला भूमिहीनों के हक में हो गया। आठ बार केस जीतने के बावजूद जमीन नहीं मिली। जमीन का सपना देखते-देखते वजीर सिंह, मुख्तियार सिंह, मल सिंह, गंगा राम, इंद्राज, ठक्करराम, छोगा राम, दीपा राम स्वर्ग सिधार चुके हैं। रुंधे गले से 73 वर्षीय उदेराम रोलण बोले कि उन्हें जमीन का हक मिल जाए, बस यही आखिरी इच्छ है। उनके कई साथियों ने यह सपना देखते-देखते अपनी जिंदगी गंवा दी। सुखदेव सिंह पन्नू ने बताया कि उसके दादा वजीर सिंह केस लड़ते-लड़ते भगवान को प्यारे हो गए, अब उनके पिता भी थककर निराश हो गए हैं। हुण मैं तीसरी पीढ़ी रब्ब तो अरदास करदा हां कि अपने बुजुर्गां दा सपना पूरा करां।
90 हजार में किया वकील
आठ बार केस हारने के बावजूद भूमि मालिक वर्ष 2004 में हाईकोर्ट में चला गया। केस किस स्थिति में है? यह जानने के लिए भूमिहीन लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाते रहे। डबवाली से न्याय न मिला तो सिरसा जाने लगे। आखिरकार वे न्याय पाने के लिए हाईकोर्ट पहुंचे। सरकार केस को कैसे लड़ रही है? 12 सालों में सरकार ने क्या किया? यह जानने के लिए उन्होंने 90 हजार रुपये एकत्र किए। अपने खर्चे पर एक वकील खड़ा किया है। वकील ने ही अगली तारीख 17 मार्च 2016 बताई है।
सीटीएम को सौंपा ज्ञापन
बुधवार को भूमिहीन रिछपाल रोलण, ओमप्रकाश, सुखदेव, परस राम, आत्मा राम, आदराम, कृष्ण कुमार ने सीटीएम सिरसा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर 33 वर्ष पुराना सरप्लस जमीन केस उच्च न्यायालय में विशेष निगरानी (जल्दी सुनवाई) हेतू अपील द्वारा हल करवाने की मांग की। भूमिहीनों ने बताया कि हाईकोर्ट में बारह सालों से लंबित मामले में आज तक उन्हें बुलाया नहीं गया। ऐसे में उनका वकील अपना पक्ष रखेगा।