फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sirsa News: मंदे पड़े धंधे में डाली जान, दीयों को दिया नया रूप, बढ़ी डिमांड

Mon, 16 Oct 2023 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
विज्ञापन
मिट़्टी के तैयार किए हुए बर्तनों को दिखाता कुंभकार । 
विज्ञापन
ओढां।
विज्ञापन

दिवाली पर दीयों की रोशनी का अपना ही महत्व और खूबसूरती होती है। आज आधुनिकता के दौर में बेसक रंग-बिरंगी लाइटों ने अपना स्थान ले लिया हो, लेकिन दीयों की अहमियत आज भी कम नहीं हुई है। दिवाली की तैयारी मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कारीगरों ने शुरू कर दी है। उन्हें उम्मीद है कि बुझ रहे दिये के कारोबार में इस बार दिवाली घी डालने का काम करेगी और उन्हें अच्छा मुनाफा होगा। क्योंकि सरकार भी स्वरोजगार को बढ़ावा दे रही है। गांव ओढ़ां के युवा कुंभकार मदन लाल अपने परिवार के साथ दीये बनाने में लगा है। उसने भी अपने पुश्तैनी कार्य को अपनी आजीविका का साधन बनाया है। इस नए कुंभकार ने मंदे पड़े इस धंधे में जान डाल दी है।

बन चुके हैं करीब 80 हजार मिट्टी के बर्तन

करीब 2 सप्ताह पूर्व मदन लाल व उसके परिवार ने दीये बनाने का काम शुरू किया था। वह अब तक करीब 55 हजार दीये, 1500 गुल्लक, 6 हजार छोटे कलश, 8 हजार कलश व अन्य मिट्टी के बर्तन बना चुके हैं। इसके अतिरिक्त मदन लाल की भट्ठी में करीब 10 हजार दीये, 1500 छोटे कलश और करीब 2 हजार कलश तैयार रहे हैं।
विज्ञापन



करवाचौथ के लिए भी बनाया कुछ नया

करवाचौथ में 15 दिन का समय शेष है। करवाचौथ के लिए मदन ने मिट्टी के छोटे कलशनुमा बर्तन, जिसे आम भाषा में करवा बोला जाता है तैयार किए हैं। इस बार उसने इन करवों को फैन्सी डिजाइन के साथ नया लुक दिया है। इससे मदन को सामान्य बिक्री के बजाय अच्छी बिक्री होने की उम्मीद है। उसने 8 हजार करवे तैयार किए हैं, जिनकी मांग बढ़ी है।


नये लुक के साथ बन रहे दीये

28 वर्षीय इस युवा कुंभकार मदन लाल ने इस बार अपने पिता के पुराने डिजाइन को बदलकर दीयों व अन्य बर्तनों को नया लुक दिया है। इससे पहले उसका पिता अमर सिंह पुराने ढंग से ही दीये बनाता आ रहा है। इस बार उसने दीपावली पर लक्ष्मी पूजन, गणपति व रिद्धि-सिद्धि पूजन के लिए अलग-अलग ढंग से फैन्सी व आकर्षक दीये तैयार किए हैं। इन दीयों की कीमत 3 रुपये से 30 रुपये तक है। बर्तनों में नया डिजाइन लोगों को इस कदर भाया कि त्योहार से पूर्व ही अब तक उसके करीब 40 हजार दीये व अन्य बर्तन बिक चुके हैं। मदन लाल ने दीपावली को जगमग करने के लिए एक लाख फैन्सी दीयों का लक्ष्य रखा है। उसे उम्मीद है कि इस बार उसका कार्य विगत वर्षों से भी बेहतर निकलेगा। मदन ने कहा कि वह इस धंधे में और भी नवाचार करेगा।

पिता के बाद बेटे ने संभाला चाक

मदन लाल का ये पुश्तैनी कार्य है। मदन का पिता 60 वर्षीय अमर सिंह बचपन से ही ये कार्य करता आ रहा है। अमर सिंह उसे अपने पुश्तैनी धंधे में डालना चाहता था, लेकिन मदन इस धंधे में नहीं आना चाहता था। 10वीं तक पढ़ाई करने के बाद मदन लाल चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर ड्राइविंग करने लगा, लेकिन अपने पिता के अस्वस्थ होने के बाद वह ड्राइविंग छोड़ अपने घर आ गया और अपना पुश्तैनी कार्य संभाल लिया। मदन ने चाक संभालते हुए सोशल मीडिया का सहारा लेकर इस कार्य में कुछ नवाचार किया। इस नए कुंभकार ने मंदे पड़े इस धंधे में जान डाल दी। इससे पहले अमर सिंह व उसकी पत्नी लक्ष्मी दोनों बर्तन बनाकर गांवों में फेरी पर जाते थे। लेकिन मदन लाल के बनाए दीये व बर्तन लेने के लिए दुकानदार व लोग स्वयं उसके घर आते हैं। मदन के मुताबिक पिछले 2-3 वर्षों से लोगों का मिट्टी के बर्तनों की तरफ रुझान फिर से बढ़ा है। मदन लाल ने बताया कि लोग हर चीज में कुछ नया चाहते हैं, इसलिए उसने इस बार दीपावली पर अलग-अलग तरह के कई दीये तैयार किए हैं, जोकि लोगों को काफी पसंद भी आ रहे हैं।
विज्ञापन

महंगाई तोड़ रही कमर

मदन लाल ने बताया कि इस कार्य में जितनी मेहनत है, उतने दाम उन्हें नहीं मिल पाते। उनके परिवार से 4 लोग इस कार्य में मेहनत करते हैं। अगर पूरा खर्च जोड़ें तो दिहाड़ी भी मुश्किल से बचती है। उसने बताया कि पहले इस कार्य में बचत ठीक हो जाती थी, क्योंकि उस वक्त मिट्टी व अन्य संसाधन महंगे नहीं थे, लेकिन अब एक तो संसाधन महंगे हो गए और मिट्टी की ट्रॉली भी करीब 5 हजार रुपये में पड़ती है। एक बार भट्ठी में पकाने पर भी 10 हजार से अधिक का खर्च आता है। उसने कहा कि इस धंधे को जीवित रखने के लिए सरकार को कुंभकारों के हितार्थ योजना चलानी चाहिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें