संवाद न्यूज एजेंसी
ओढां। नरमे की कमजोर फसल के कारण जहां किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं चुगाई करने वाले मजदूरों को भी लाभ नहीं मिल रहा है। मजदूरों की माने तो फसल बेहद कमजोर होने के चलते उन्हें प्रतिदिन चुगाई के रूप में 300 से 400 रुपये भी दिहाड़ी नहीं पड़ रही।
वहीं किसानों का कहना है कि मौजूदा फसल से खर्च भी पूरा कर पाना मुश्किल हो गया है। इस बार भाव अच्छा है, तो फसल नहीं है। मजदूरों की चुगाई भी बढ़ गई है। किसानों के मुताबिक उन्हें इस बार उम्मीद थी कि नरमे की फसल प्रति एकड़ 12 से 15 क्विंटल हो जाएगी। अब तो 4 क्विंटल की औसत मुश्किल से आ रही है।
वहीं, नरमे का रकबा इस बार बड़े स्तर पर घटा है। नरमे में होने वाले नुकसान के चलते किसानों ने इस बार धान को प्रमुखता दी है। सवा लाख एकड़ भूमि पर इस बार अतिरिक्त धान की बिजाई हुई है। ऐसे में नरमे की चुगाई करने वाले मजदूरों के लिए आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। धान की कटाई मशीनों से होती है। इस कारण बड़े स्तर पर मजदूर नरमे की चुगाई के लिए गुजरात चले गए हैं। जो मजदूर बचे हैं, वे कमजोर नरमे की फसल में उनका गुजर बसर भी नहीं हो रहा है।
किसान बोले- लागत पूरी हो जाए वह ही अच्छा
छह एकड़ में नरमे की बिजाई की थी। पिछली बार फसल कम थी, लेकिन नरमे में वजन था। इस बार न तो फसल ठीक है और न ही वजन है। 6 एकड़ में 60 क्विंटल फसल की उम्मीद थी, अब तो तीसरे हिस्से की फसल भी मुश्किल से होगी। फसल से बहुत उम्मीद लगाए हुए थे। अब लागत भी पूरी हो जाए तो वही अच्छा होगा। -जगदीश सहारण, ओढ़ा
फसल को देखते हैं, तो मन करता है कि खेती करना छोड़ दे। चार महीने की मेहनत जब सामने इस रूप में आती है तो दिल दुखता है। 14 एकड़ में नरमे की बिजाई की थी। सोचा था कि फसल अच्छी होगी तो बैंक लोन उतर जाएगा। नौ एकड़ फसल में उम्मीद के अनुरूप टिंडे नहीं थे, तो पहले ही हल चला दिया था। बची हुई फसल में भी कुछ खास नहीं है। सरकार से नरमे का अच्छा बीज आज तक नहीं मिला है। सिरसा में कॉटन केंद्र होने के बाद भी घटिया स्तर का बीज बाजार में मिलता है। - इकबाल सिंह।
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छह एकड़ में नरमे की बिजाई की थी। फसल बेहद कमजोर है। दो एकड़ में पहले ही हल चला दिया था। बिजाई, बुआई और खाद स्प्रे का खर्च निकल जाए तो गनीमत होगी। चुगाई 1200 रुपये क्विंटल से 1500 रुपये क्विंटल पहुंच गई है। अब बताओ किसान क्या करें। सरकार से यही मांग है कि किसानों को उच्च क्वालिटी के बीज, कीटनाशक व समय पर खाद मुहैया करवाए। - रामकुमार नेहरा।
मजदूर बोले- अच्छी कमाई के लिए आए थे
राजस्थान से हरियाणा में चुगाई के लिए आया था। सोचा था इस बार नरमा चुगाई से अच्छी कमाई होगी। अब प्रतिदिन की 300 रुपये प्रति व्यक्ति की दिहाड़ी भी पल्ले नहीं पड़ रही है। दिन भर में जहां 50 से 60 किलो नरमा चुगते थे। अब 25 से 30 ही चुग पा रहे है। सोचा था दिवाली के त्योहार पर अच्छी कमाई कर लेंगे। -परशुराम।
बीएड करने के बाद आगे की तैयार कर रहा हूं। पैसे की जरूरत होती है। इसलिए चुगाई के सीजन में हरियाणा में आया हूं। दिनभर में मात्र 30 किलो ही चुगाई हो पाती है। एक तो फसल देखने में कमजोर है और दूसरा उसमें वजन ही नहीं है। उम्मीद नहीं है कि जो सोचकर आए थे उतना कमा पाएंगे। -प्रवेश कुमार।
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परिवार के साथ नरमे की चुगाई के लिए आई हूं। हमारे क्षेत्र में धान होता है। धान लगाने के बाद खाली बैठने से अच्छा नरमे की चुगाई ही क्यों न करें। अब हालात ऐसे बन गए हैं कि आधे सीजन के बीच में ही लौटने की सोच रहे हैं। दिहाड़ी भी पूरी नहीं पड़ रही है। -सर्वजीत कौर।-