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किसानों ने बिजली निगम कार्यालय में दिया धरना

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बिजली निगम में धरने के दौरान अधीक्षण अभियंता से बातचीत करते किसान। - फोटो : Sirsa
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बिजली निगम द्वारा उपभोक्ताओं से साल में दो बार सिक्योरिटी राशि जमा करवाने का फैसला लिया गया है, जिसके विरोध में किसानों ने बरनाला रोड स्थित 33 केवी बिजली निगम कार्यालय में धरना दिया। किसान डेढ़ घंटे तक निगम में सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे, जिसके पश्चात किसानों ने निगम अधीक्षण अभियंता को मांग पत्र सौंप नियमों में किए बदलाव को वापस लिए जाने और हर माह बिजली बिल दिए जाने की मांग उठाई। वहीं उन्होंने कहा कि अगर नियमों में किए बदलाव को सरकार वापस नहीं लेगी तो किसान बिजली बिलों का भुगतान नहीं करेंगे और आंदोलन करेंगे।
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बिजली बिल के नियमों में बदलाव करने के विरोध में भूपेंद्र सिंह वैदवाला और लखविंद्र सिंह औलख की अध्यक्षता में किसान बस स्टैंड के समक्ष स्थित 33 केवी बिजली निगम कार्यालय में पहुंच गए। किसानों ने निगम में धरना दिया और सरकार व बिजली निगम के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इसके पश्चात निगम के एसडीओ किसानों से मिलने पहुंचे, लेकिन किसान एसई से मिलने की जिद्द पर अड़े रहे। किसान नेता भूपेंद्र सिंह वैदवाला ने कहा कि सरकार अपनी मर्जी से बिजली बिलों के नियमों में बदलाव कर रही है। सिक्योरिटी राशि और सरचार्ज लगा उपभोक्ताओं से अधिक बिल वसूल रही है। निगम की ओर से कई तरह के सरचार्ज लगा लोगों को धोखे में रखकर उनसे अधिक राशि ली जा रही है, जिसका नुकसान उपभोक्ता को झेलना पड़ता है।
रोड जाम करने की दी चेतावनी तो मिलने पहुंचे एसई
किसान सुबह 11:30 बजे मांगों को लेकर बिजली निगम कार्यालय में धरना देने के लिए पहुंच गए। दोपहर 12.30 बजे तक एसई किसानों की मांग सुनने के लिए नहीं पहुंचे। किसानों ने चेतावनी दी कि अगर अधिकारी 15 मिनट में मांग सुनने के लिए नहीं पहुंचे तो किसान रोड पर धरना देने को मजबूर होंगे। दोपहर 12:50 बजे बिजली निगम अधीक्षण अभियंता चंद्रशेखर जाखड़ किसानों से मिलने पहुंचे और उनका मांग पत्र सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। जिसके बाद किसानों ने धरना समाप्त कर दिया।
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किसान बोले - मांग नहीं हुई पूरी तो नहीं भरेंगे बिजली बिल
धरना प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कहा कि बिजली के बिलों में किए गए बदलाव को सरकार अगर वापस नहीं लेगी तो किसान बिजली के बिल का भुगतान नहीं करेंगे और नेताओं की तरह ही बिजली निगम कर्मचारियों और अधिकारियों को गांवों में जाने से रोका जाएगा।
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