तीन कृषि कानूनों के खिलाफ वीरवार को जिले में पांच जगहों पर जाम लगाया गया। किसानों ने नेेशनल हाइवे नंबर नौ पर साहुवाला के पास, खुईयां मलकाना टोल प्लाजा, पंजाब हरियाणा बॉर्डर के पास मुसाहिबवाला पर जाम लगाया। वहीं सिरसा के चोपटा क्षेत्र में भादरा रोड और ऐलनाबाद में जाम लगाया। जाम सुबह 12 बजे से लेकर चार बजे तक लगाया गया।
किसानों द्वारा वीरवार को जिला मेें 5 जगहों पर दोपहर 12 बजे से सांय 4 बजे तक रोड जाम करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया था। किसानों ने नेशनल हाईवे नंबर नौ पर साहुवाला प्रथम व खुईयां मलकाना में टोल प्लाजा के पास जाम लगाया। किसान निर्धारित समय मुताबिक 12 बजे नेशनल हाईवे पर आ गए और सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी करते रहे। किसान नेता परमजीत सिंह माखा व मलकीत सिंह, प्रेम सिंह ने सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त करते हुए जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने कहा कि सरकार को ये तीनों काले कृषि कानून वापस लेने के लिए मजबूर कर देंगे।
किसानों ने नेशनल हाइवे नंबर नौ पर साहुवाला-प्रथम में किसानों ने बस स्टैंड के निकट जाम लगाया था। इस दौरान जसवीर सिंह भाटी, बाबा गुरमीत सिंह तिलोकेवाला, गुरदास सिंह लक्कड़ांवाली व राजकुमार शेखूपुरिया किसान नेता मौजूद रहे। इस मौके पर बाबा गुरमीत सिंह तिलोकेवा ने केंद्र सरकार के खिलाफ भड़ास निकालते हुए कहा कि सरकार किसानों के साथ सरासर नाइंसाफी कर रही है। किसानों द्वारा लगातार विरोध करने के बाद भी सरकार औद्योगिक घरानों को फायदा पहुंचाने का काम कर रही है। किसान संगठनों पर नाराजगी जाहिर करते हुए बाबा गुरमीत सिंह तिलोकेवाला ने कहा कि किसान संगठनों की एकता में कमी होने के चलते लगातार धरने प्रदर्शन के बावजूद सरकार के कानों तक जूं नहीं सरक रही। उन्होंने कहा कि रोड जाम का कार्यक्रम जब एक जगह पर रखा गया था तो सिरसा में 6 जगहों पर धरना लगाकर रोड जाम करने का क्या मतलब? जब एक जगह किसानों की भीड़ होती तो प्रशासन व सरकार पर दबाव बनता।
किसान नेता पर झूठ बोलने का आरोप, मंच छोड़ गए तिलोकेवाला
संबोधन के दौरान बाबा गुरमीत सिंह ने सबके सामने माइक पर ही किसान नेता गुरदास सिंह लक्कड़ांवाली पर झूठ बोलने का आरोप जड़ा तो सभी लोग हैरान रह गए। बाबा गुरमीत सिंह ने पास खड़े गुरदास सिंह से कहा कि वे सबके सामने इसका जवाब दें। जिस पर गुरदास सिंह जैसे ही माइक लेकर जवाब देने लगे तो लाइट चली गई। इसी दौरान बाबा गुरमीत सिंह मंच छोड़कर किसानों के बीच जा बैठे। इस बारे बाबा गुरमीत सिंह ने संवाददाता से बातचीत में कहा कि गुरदास सिंह ने उन्हें धरने को लेकर गांवों में जाने की बात कही थी। जिसके लिए उन्होंने अन्य कार्यक्रम रद्द कर दिए। लेकिन गुरदास सिंह जान बूझकर नहीं आए। उन्होंने कहा कि किसानों में एकता नहीं है। सब राजनीति के भूखे हैं। वहीं गुरदास सिंह लक्कड़ांवाली ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं। उनकी तबीयत खराब होने के चलते वे स्वयं कहीं नहीं गए।
प्रशासन ने वाहनों के रूट किए डायवर्ट
खुईयां मलककाना में रोड जाम को लेकर वाहनों का रुट चेंज किया गया था। वाहनों को गांव खुईयां मलकाना, दीवानखेड़ा व सांवतखेड़ा होकर गुजारा गया तो वहीं साहुवाला में वाहनों को रघुआना, छतरियां व पंजुआना से होकर निकाला गया। इस दौरान पुलिस ने कई जगहों पर नाकाबंदी करते हुए वाहनों को उक्त रास्तों से निकाला।
26 नवंबर को दिल्ली कूच करेंगे किसान : भारूखेड़ा
पंजाब हरियाणा बार्डर पर स्थित गांव मुसाहिबवाला में हरियाणा किसान मंच के प्रदेशाध्यक्ष प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा ने बताया कि पूरे भारत में आज तीनों किसान विरोधी काले कानूनों के खिलाफ बंद किया गया है। किसानों की जुटी भीड़ ने सरकार को भी सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। सरकार तानाशाही तरीके से किसानों को दबाना चाहती है, लेकिन किसान की आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा। अकेला किसान वर्ग ही ऐसा था, जोकि देश की अर्थव्यवस्था को संभाल रहा था, लेकिन तीन काले कानून बनाकर सरकार ने उसकी भी कमर तोडने का काम किया है। उन्होंने कहा कि सरकार जब तक तीनों काले कानूनों को वापस नहीं लेती, तब तक देश का किसान चुप नहीं बैठेगा। भारूखेड़ा ने कहा कि आगामी 16 नवंबर को लोक पंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें 26 नवंबर को दिल्ली कूच करने की रणनीति बनाई जाएगी। लोक पंचायत में हजारों किसान ट्रैक्टरों व निजी वाहनों से पहुंचेंगे और सरकार के खिलाफ अपनी आवाज को बुलंद करेंगे।