चोपटा। खंड के गांव शाहपुरिया में मरगोजा खरपतवार से प्रभावित हुई सरसों की फसल पर किसानों ने ट्रैक्टर चला दिया। ताकि दूसरी फसल की बिजाई कर सके। किसानों का कहना है कि सरसों में फैला मरगोजा रोग का कोई इलाज नहीं है इसलिए उन्हें मजबूरन सरसों की फसल पर टैक्टर चलाना पड़ रहा है। गांव शाहपुरिया और कागदाना के बीच खेतों में करीब 50 एकड़ फसल में सरसों की फसल मरगोजा से प्रभावित होकर शत प्रतिशत खराब हो गई है। जिससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बता दें कि इस रोग का कोई इलाज नहीं होने के कारण किसानों ने हरी फसल को नष्ट करना शुरू कर दिया है। शाहपुरिया के किसान संदीप कुलड़िया ने चार एकड़ में सरसों की बिजाई की थी और पूरी फसल मरगोजा से प्रभावित है। संदीप ने बताया कि उन्होंने दो एकड़ सरसों की खड़ी फसल में ट्रैक्टर चला दिया है और दो एकड़ में एक-दो दिन में अपनी फसल को उखाड़ देगा। सरसों की बिजाई में हजारों रुपये खर्च करने के बाद अब फसल को नष्ट करना दुखदायक है। लेकिन मजबूरन अपनी फसल को उखाड़नी पड़ रही है।
इसी प्रकार किसान जयवीर की भी सरसों की फसल मरगोजा कि चपेट में आ गई है। शाहपुरिया के नजदीक लगते गांव कागदाना के किसान राव वीरेंद्र की डेढ़ एकड़ में सरसों की फसल मरगोजा से नष्ट हो गई है। इसके अलावा सूबे सिंह यादव की भी सरसों की फसल में मरगोजा की चपेट में है। किसानों का कहना है कि यह एक खरपतवार है जो सरसों के साथ ही जड़ों में उग जाता है और सरसों की फसल की बढवार को रोक देता है इसका अभी तक कोई इलाज नहीं है इसलिए सरसों की फसल को नष्ट करना ही बेहतर उपाय है। खाली जमीन में जौ फसल की बिजाई की जा सकती है।
मरगोजा खरपतवार एक वार्षिक पौधा है। जिसका प्रसार बीज से होता है इसके बीज बहुत छोटे अंडाकार गहरे भूरे काले रंग के होते हैं। जो आसानी से दिखाई नहीं देते इसका एक पौधा एक से दो लाख बीज बनाने की क्षमता रखता है और जमीन में 10 से 15 साल पड़े रहने के बावजूद भी फिर उग सकता है। उन्होंने बताया कि मरगोजा खरपतवार होने पर 2 साल तक जमीन में सरसों की बिजाई नहीं करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सही समय पर उचित मात्रा में दवाई के छिड़काव से मरगोजा पर नियंत्रण पाया जा सकता है।9
-डॉ. शैलेंद्र सहारण, कृषि विकास अधिकारी