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सेम की समस्या खत्म करने का मामला ठंडे बस्ते में, 22 हजार एकड़ भूमि पर फसलें लहलहाने का किसानों का सपना अधूरा

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सेम के चलते बंजर पड़ी जमीन। - फोटो : Sirsa
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चोपटा क्षेत्र में सेम की समस्या खत्म करने को लेकर सरकार बिलकुल भी गंभीर दिखाई नहीं दे रही है। सरकार की उदासीनता को देखकर लग रहा है कि क्षेत्र के 20-25 गावों में वर्षों से बनी सेम की समस्या कभी समाप्त नहीं हो पाएगा। वर्षों से बंजर पड़ी करीब 22000 एकड़ भूमि पर कभी भी फसलें नहीं लहराएंगी। ग्रामीणों का कहना है कि जब चुनाव का समय निकट आता है तो सेम को खत्म करने का झुनझुना बजाया जाता है और चुनाव के बाद सेम ग्रस्त जमीन के तरफ कोई ध्यान नहीं देता। बार-बार टीमों द्वारा सर्वे के बाद भी ग्रामीणों को आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
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पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनाव के समय सेम की समस्या को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर हरियाणा ऑपरेशनल पायलट प्रोजेक्ट की टीम द्वारा सौर ऊर्जा आधारित पायलट प्रोजेक्ट को अंतिम चरण के सर्वे को लेकर गांव शक्कर मंदोरी का दौरा किया था। सेम के खात्मे के लिए सबसे पहले शक्कर मंदोरी, शाहपूरिया, दड़बा कलां, नाथूसरी कलां चार गावों का चयन किया गया है जिनमें सौर ऊर्जा आधारित नलकूप लगाकर पानी का लेवल नीचा कर जमीन की लवणता को कम किया जाएगा। हरियाणा ऑपरेशनल पायलट प्रोजेक्ट टीम में कृषि विकास अधिकारी राजेंद्र कुमार, जेई नरेश कुमार व सर्वेयर आजाद सिंह ने शक्करमदोरी गांव में सेम ग्रस्त जमीन से पानी निकासी के लिए नलकूप लगाने की जगह भी चिह्नित की। शक्कर मंदोरी में करीब 24-25 नलकूप लगाकर सेम का खात्मा किये जाने का प्लान भी बताया जा रहा था। इसके बाद अन्य गांवों में प्रोजेक्ट को लागू किया जाएगा। हरियाणा ऑपरेशनल पायलट प्रोजेक्ट की उच्च स्तरीय टीम ने सेम ग्रस्त गांवों का दौराकर सेम से निपटने के लिए सौर ऊर्जा आधारित ट्यूबवेलों की संख्या व स्थिति को अंतिम रूप दिया।
ग्रामीण अशोक कुमार, सुरेश कुमार, सतबीर सिंह, राममूर्ति, महेंद्र सिंह ने बताया कि क्षेत्र में वर्ष 1992 में सेम की शुरूआत हो गई थी। चोपटा क्षेत्र के 20 गावों में 25 साल से करीब 22 हजार एकड़ जमीन सेम के कारण बंजर हो गई है। जमीन में लवणता की मात्रा अधिक होने के कारण अनाज का एक दाना भी नहीं उग पाता। जमीन दलदली होने के कारण किसान खेती से महरूम हो गए हैं व मजदूरी करने को मजबूर हैं। जिनकी जमीन सेम की चपेट में है उन किसानों की हालत बदतर हो गई है। सेम से मकान भी गिर रहे हैं। चोपटा क्षेत्र के दड़बा कलां, मानक दिवान, रुपाणा खुर्द, नारायण खेड़ा, माखोसरानी, लुदेसर, रूपाना बिश्नोइयां, गंजा रूपाना, शक्कर मंदोरी, निरबाण, गुडिया खेड़ा, रूपावास, तरकांवाली, नाथूसरी कलां, कैरांवाली, शाहपूरिया की जमीन बंजर हो रही हैं।
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कोट
प्रोजेक्ट को अंतिम रूप देने के लिए हरियाणा ऑपरेशनल पायलट प्रोजेक्ट ने शक्कर मंदोरी में नलकूप लगाने के लिए स्थान चिह्नित किए। इससे लगता था कि क्षेत्र से सेम की समस्या जल्द ही खत्म होने वाली है। सौर ऊर्जा आधारित ट्यूबवेल व अन्य कार्यों का फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया है।
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-वीरेंद्र सहू, चेयरमैन ब्लॉक समिति नाथूसरी चोपटा।
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