मुआवजे के लिए लघु सचिवालय में आंदोलनरत किसानों का धैर्य आठवें दिन जवाब दे गया। किसान कृषि मंत्री ओपी धनखड़ की शव यात्रा लेकर चौटाला रोड़ पर आ गए।
धनखड़ का पुतला फूंकते हुए जूतों, चप्पलों से जमकर पीटा। सफेद मक्खी से बर्बाद हुई फसलों के मुआवजे की मांग को लेकर राष्ट्रीय किसान संगठन के बैनर तले किसान लघु सचिवालय में क्रमिक अनशन पर चल रहे हैं।
कोई सुनवाई न होने की दशा में मंगलवार को किसान अचानक आक्रमक हो गए। अब तक राजनीतिक इशारे पर आंदोलन मानकर चल रहा प्रशासन एकदम सकते में आ गया।
दोपहर बाद करीब दो बजे एसडीएम अजय कुमार किसानों के बीच पहुंचे। किसानों को शांति बनाए रखने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि किसान कानून हाथ में लेने की कोशिश न करें।
किसानों ने दो टूक कहा कि उनकी शर्तें मान ली गई हैं, वे उन्हें लिखित में आश्वासन दें, वे फौरी तौर पर आंदोलन वापस ले लेंगे। वरना लघु सचिवालय में जुटे किसान जो कहेंगे, उसी अनुसार आंदोलन राह पकड़ेगा।
कोई जवाब न मिलने से किसान गुस्से में आ गए। कृषि ओपी धनखड़ का पुतला बनाने में जुट गए। किसान नेता जसवीर सिंह भाटी ने कहा कि किसानों का उपहास उड़ाने वाले ओपी धनखड़ पिछले छह माह से बहानेबाजी करके मुआवजा राशि नहीं बांट रहे हैं।
पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के दौरान वे हलका डबवाली में आए थे। उन्होंने चेक तैयार होने की बात करते हुए चुनाव के फौरन बाद उन्हें बांटने का आश्वासन दिया था।
अब अनाप-शनाप बयानबाजी करके किसानों के जख्म कुरेद रहे हैं। आखिर वे कब तक सहन करेंगे? ठीक तीन बजे किसान कृषि मंत्री की शव यात्रा लेकर लघु सचिवालय के ठीक सामने चौटाला रोड़ पर पहुंचे।
किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों में इतना गुस्सा था कि धनखड़ के पुतले को फूंकते हुए उन्होंने चप्पलों, जूतों से पीटा। किसान नेता ने कहा कि सरकार उनका इम्तिहान ले रही है। अब किसान जो भी पग उठाएंगे, उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
मंगलवार को बलतेज सिंह नीलेयांवाली, भरपूर सिंह फौजी, मुखपाल सिंह देसूजोधा, मलकीत सिंह डबवाली, सुरेंद्र सुथार बिज्जुवाली व नछतर सिंह माखा आदि भूख हड़ताल पर बैठे।